गहन पीड़ा, संताप के आँसू
छू जाय जब मन के तार
आँसू बनते मन के द्वार
आँसू जैसे सीप में मोती
स्नेह-प्रेम की सही कसौटी l
दिल पर जब लगती है चोट
दु:स्सह दुःख पीड़ा का बोझ
हर्ष का मन में जब अतिरेक
रुकते नहीं आँसू के वेग
मन हल्का कम करते शोक
आँसू सचमुच हैं अनमोल l
आँखों की नमी के रक्षक
आँसू वे कहलाते बेसल
नयन साफ़, स्वच्छ परिवेश
आँसू होते वे रिफ्लैक्स लेक्श
नेत्रनीर भर आते लोचन
भावुक मन, परिपूर्ण इमोशन l
आँसू होते मन के मित्र
तन-मन निर्मल और पवित्र
जीवन को रखते जीवंत
इनकी शक्ति असीम-अनंत
संवेदना, शिल्प के खोले द्वार
जीवनसाथी हैं अश्रुधार।।