Tuesday, August 17, 2021

पालक-बालक

बच्चे होते हैं जिज्ञासु

करें जिज्ञासा उसकी शांत

प्रश्नोत्तर से ही मिटेगी

उसकेकच्चे मन की भ्रांति

जिज्ञासा ही है बच्चों की

ज्ञानवृद्धि का उत्तम माध्यम

परिवार ही प्रथम पाठशाला

बच्चे का होता है दर्पण ।

                तुलना करें न अन्य बच्चों से

                कुंठित होगी उसकी इच्छा

                प्रिय वाणी से बढ़े मनोबल

                प्रगति करेगा निश्चित बच्चा

                खेलें-कूदें समय दें उसको

                प्रतिदिन घंटे-दो-घंटे

                मित्रवत व्यवहार करें उससे

                बच्चे होते मन के सच्चे ।

अपनी इच्छा न लादें कथमपि

कभी नहीं दें अनुचित प्रेशर

मनोनुकूल क्षेत्र ही चुनना

भविष्य के लिए होगा श्रेयस्कर

प्रेरित करें, सहयोग करें

सम्मान करें उसकी इच्छा का

अपनी मर्ज़ी के क्षेत्र में अग्रसर

फहराएगा वह विजय-पताका ।

                पारिवारिक वातावरण का निश्चित

                बच्चे पर पड़ता है असर

                माता-पिता का प्यार-दुलार

                बच्चों का होता पथ-दर्शक

                अच्छी शिक्षा दें बच्चों को

                सही मार्ग पर पालक-बालक

                नींव सुदृढ़ होने पर ही

                सही बने मज़बूत इमारत ।।

Saturday, August 14, 2021

खेत-खलिहान

ग्रामीण अस्मिता के संवाहक 

सुख-समृद्धि के सोपान

भारत की आत्मा खेतों में

गाँव की इनसे पहचान

खाद्य उत्पादन के उत्प्रेरक

खेत, खलिहान और किसान ।

               सीधी, टेढ़ी-मेढ़ी आर

               खेतों के गले की हार

               कहीं हल तो कहीं ट्रैक्टर

               बीनें कहीं ख़र-पतवार

               रोपनी-कटनी दृश्य मनोरम    

               पकी फ़सल खलिहान गुलज़ार ।

सुबह-शाम खेत ही जीवन

खेत बिना जीवन वीरान

माथे पगड़ी और मुरैठा

हाथ में लाठी है पहचान

अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ कृषक हैं

कर्म क्षेत्र खेत खलिहान ।

                खेतों से आती ख़ुशहाली

                कृषकों में ऊर्जा संचार

                हरे-भरे खेत लगे सुहावन    

                प्राकृतिक शोभा के भंडार

                असली भारत बसे गाँव में

                खेत खलिहान जीवन आधार ।

कृषि प्रधान देश भारत में

अर्थ व्यवस्था के आयाम

शस्य-श्यामला हरित-भरित

लोगों के बसते मन-प्राण

औद्योगीकरण के युग में

संरक्षित हों खेत खलिहान ।।

Monday, August 2, 2021

श्रम शक्ति

श्रम ही शक्ति, श्रम ही पूजा

इसका कोई विकल्प न दूज़ा

श्रम शक्ति दुनिया को प्यारी

कभी जाए न मेहनत ख़ाली

पत्थर काट बनती है राह

दशरथ माँझी बने सरताज ।

                    श्रम से ही सपने साकार

                    सफल जीवन का आधार

                    चींटी चलती कोशों दूर

                    आलस्य उसे नहीं मंजूर

                    श्रम शक्ति अनुपम, अनमोल

                    श्रम से बदले भाग्य योग ।

श्रम से कृषक उगाते अन्न

देश बने सक्षम-संपन्न

श्रम ही साधन, श्रम ही ध्येय

जीवन पथ का है पाथेय

श्रम से ज्ञान, श्रम से विज्ञान

श्रम से पूर्ण आस-अरमान ।

                    श्रम से जी चुराना पाप

                    बिना श्रम जीवन अभिशाप

                    श्रम से सुलझे बिगड़े काम

                    श्रम ही संज्ञा और सर्वनाम

                    वेद-पुराण का अंतर्निहित मंत्र

                    श्रम ही जीवन का मूलमंत्र ।।