Monday, December 27, 2021

सुख-दुख का जीवन सामंजन


 

वाणी कठोर अवसादित मन 

जीवन-शैली में असंयम 

स्वजन विरोध, प्रसिद्धि ह्रास 

परिवर्तित जीवन अंदाज 

निष्क्रिय-शिथिल-प्रमादित मन 

चिंतित मानव के हैं लक्षण। 

                       चिंता हर लेती सुख औ शांति 

                       शंकित होता मन भाँति-भाँति

                      ग्रसित कर लेता विविध रोग 

                     अकारण उठता सतत् क्रोध 

                     चिता से होती चिंता क्रूर

                    समस्त समस्या की है मूल। 

चिंता से तिल-तिल आघात

हृदय-शूल किंचित व्याघात

कुण्ठित हो जाता बुद्धि-विवेक

पग-पग पाता कष्ट-क्लेश 

उचित-अनुचित का मिटे ज्ञान

अंकिचन, निरीह होता इंसान।

                    अहर्निश चिंता नींद हराम

                    स्वास्थ्य हानि अनमने काम

                    सामाजिक संबंधों में विच्छेद

                    चिंता से जागृत कलह-द्वेष 

                    चिंता करता है मनुष्य व्यर्थ

                    चिंतित मन से होता अनर्थ।

सुख-दुख का जीवन सामंजन

ईश्वर इच्छा का अभिनंदन

सकारात्मक सोच चिंता का अंत

सुखी जीवन का है मूल मंत्र

सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग

पतझड़ है निश्चित है बसंत।

                    सृजनशीलता का विकास 

                    सम्यक् दिनचर्या योगाभ्यास

                    इच्छा सीमित संतोषी मन

                    तनाव मुक्त हर्षित जीवन 

                    मद्य सेवन का तिरस्कार 

                    सफल जीवन का मूलाधार।। 

Tuesday, December 21, 2021

नदी की आवाज

 


सभ्यता
-संस्कृति की संवाहक

जीवन-प्रवाह की है प्रतीक

जीवन दायिनी होती नदियाँ

निरंतरता की देती हैं सीख

जलश्रोत मात्र नहीं नदियाँ

नदियाँ मधुर जीवन संगीत।

          जलीय जीवों की आश्रय स्थली

          जल ऊर्जा की अनुपम श्रोत

          कृषि, सिंचाई, मछली पालन

          नदी नीर पर निर्भर लोग

          विरासत और विकास की जननी

          जल आधारित विकास-उद्योग।

गंगा-जमुनी संस्कृति हमारी

नदियों पर हम करते गर्व

आस्था, विश्वास की परिचायक

मनाते हम नदी-उत्सव

नदियों को रखना स्वच्छ-धवल

जल-संरक्षण ही सही विकल्प।

        जीवन-रेखा जड़-चेतन की

        अस्तित्व है संकट में आज

        प्रदूषण मुक्ति हेतु नदियाँ

        कल-कल कर देतीं आवाज़

        नदी की रक्षा, अपनी रक्षा

        अविरल रखें नदी जल धार।।

Friday, December 3, 2021

समय की सत्ता

समय की होती अपनी सत्ता 
होती इसकी अपनी चाल  
इसकी धारा कभी न रुकती
आगे होते इसके बाल
समय पर होते ऋतु-परिवर्तन 
समय की लीला अपरंपार 
समय के साथ चलना श्रेयस्कर
समय अनुकूल उचित व्यवहार ।
               समय बड़ा अनमोल रत्न है
               करें नहीं समय बर्बाद 
               बेहतर उपयोग अपेक्षित-वांछित
               समय-चक्र चालित संसार 
               समयबद्ध हो जीवन-चर्या
               समय पर काम, पूर्ण प्रयास 
               समय की क़द्र मूलमंत्र है
               फल की प्राप्ति कर्म अनुसार ।
समय के सदुपयोग से मिलती
जीवन में शांति-समृद्धि
समय जोड़े संबंधों के पुल 
समय सुधा अमूल्य निधि 
समय को बदलें अवसर में 
निश्चित होगी कार्य-सिद्धि 
समय को पकड़ें सही समय पर
समय पालन से ही श्री वृद्धि ।
                 टाल-मटोल की नीति है घातक
                 समय पर काम, सार्थक सोच 
                 समय पालन जीवन-दर्शन है 
                 समय का करें सम्यक् उपयोग 
                 कार्य सम्पन्न करना है तत्क्षण
                 कल पर नहीं छोड़ना काम 
                 समय-प्रबंधन उन्नति कारक
                 समय पालन पर केंद्रित ध्यान ।।