Saturday, May 30, 2020

साक्षरता- सामर्थ्य



साक्षरता का दीप जलाकर,

जन-जन में विश्वास जगाएँ,

निरक्षता को दूर भगाकर,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


गली-गली और गाँव-गाँव में,

सरस्वती का सुर फैलाएँ,

बच्चे-बूढ़े या जवान हों,

सबको कॉपी-कलम थमाएँ,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


जनता का जनतंत्र है भाई,

ग्रामसभा में इसे बताएँ।

अपना शासन खुद करने को,

साक्षरता को राह दिखाएँ

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


साक्षरता अभियान की आँधी,

घर-घर सुरभित करती जाए,

निरक्षरता अभिशाप है भाई,

हमसब मिलकर इसे भगाएँ,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


गाँधीजी की कर्मभूमि में,

ग्राम-स्वराज का अलख जगाएँ,

शिक्षा है अनमोल रतन,

ऐसा हम परचम लहराएँ,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


Thursday, May 28, 2020

मुंगेर है बिहार की शान


महर्षि मूद्गल की तपोभूमि

दानभूमि कर्ण की

स्वामी सत्यानंद की योगभूमि

महिमा चण्डीस्थान की

प्राकृतिक सौंदर्य के 

अद्भूत है दर्शन

कालीपहाड़, पीरपहाड़

माथे का चंदन

ऐतिहासिक नगरी है

मुंगेर किला है प्रमाण

मुंगेर है बिहार की शान।

सीताकुण्ड, सीताचरण

ऋषिकुण्ड स्वर्ग समान

भीम बांध में तो

जन-जन के बसे प्राण

पीर का मजार है

सौहार्द्र का कीर्तिमान

उत्तर वाहिनी गंगा है

अस्मिता की पहचान

बिंद पर्वत श्रृंखला है

ऋषियों ने धरे ध्यान।

मुंगेर है बिहार की शान।


स्वतंत्रता सेनानी, पैदा हुए शूरवीर

जिले, के गौरव है, संग्रामपुर, तारापुर

उच्चैश्वर, महादेव का

करते हैं वंदन

लौहनगरी जमालपुर है

पूर्व का बर्मिंधम

भौड़ाकुण्ड, कर्ण चैड़ा

अतुलित आकर्षण

कंपनी बाग, कृष्णवाटिका की

अपनी है पहचान

मुंगेर है बिहार की शान।

चित्रकला के सिद्धहस्त

शिखर पुरूष नंदलाल

रविन्द्रनाथ टैगोर बने

गीतांजलि के सृजनहार

रॉबिनशॉ पुष्प ओ

दिनकर की रचना

श्री बाबू से जुड़ा है

जिले का गौरवगान

अमन-चैन, सुख-शांति

का हो नया विहान

मुंगेर है बिहार की शान।।


Tuesday, May 26, 2020

बाढ़ की विभीषिका



विपदा की संगिनी है बाढ़ की विभीषिका
बेवस, असहाय लोग छिनती आजीविका
बाढ़ की धार में विलीन होती बस्तियाँ
लोग-बाग बाँध पर छिन जाती खुशियाँ
नष्ट होती फसलें, बहते मवेशी
दुबक जाते वृक्षों पर विषधर संग पंछी।

जल समाधिस्थ होते सैलाब में अनेक लोग
मर्माहत हो सहते हैं स्वजनों का वियोग
इन्द्रदेव भी अपनी दिखलाते बानगी
अहर्निश वर्षा से बढ़ाते हैं त्रासदी
आशा की किरण बनती स्वयंसेवी संस्थाएँ
सरकारी राहत ही पीड़ितों की आशाएँ।

जीवंत जिजीविषा से भरा जन-मानस
विपत्तिग्रस्त होकर भी परस्पर सहायक
प्राकृतिक विपदा को झेलते धैयपूर्वक
चुनौती को अवसर में बदलने को तत्पर
बाढ़ की विभीषिका है सुरसा दुखदायिनी
सहनशक्ति, धैर्य ही विपत्ति में संगिनी।

प्राकृतिक विपदा है असीम दुखदायक
मानव-प्रवृत्ति भी विप्लव के हैं कारक
पर्यावरण संरक्षण ही दिला सकेगा त्राण
मृदा, वारि, वन-संरक्षण से संभव है कल्याण
जल-जीवन-हरियाली से ही आ सकती है क्रांति
पर्यावरण की रक्षा से ही जन-जीवन में शांति।। 

Sunday, May 24, 2020

सर्वेक्षण-संक्षेप



एरियल सर्वे, ऑर्थोफोटोग्राफी, मानचित्र निर्माण,

विशेष सर्वेक्षण में है बनना, डिजिटाइज्ड खतियान।

भू-प्रकृति उपयोग आधारित, निर्धारित लगान,

एकीकृत, सरल, प्रभावी सेवा, करना है प्रदान।।


किश्तवार, खानापुरी, सुनवाई विश्रांति,

डिजिटाइज्ड अधिकार-अभिलेख से दूर होगी भ्रांति।

ऑर्थोसत्यापन, खेसरा क्रमांकन, मुस्तकिल अनिवार्य,

किश्तवार के प्रक्रम में है महत्वपूर्ण कार्य।।


ग्राम-सरहद का निश्चित पैमाना, खोजें पुराना तीन सीमाना,

हू-ब-हू नक्शा करें तैयार, उत्तर-पश्चिम से लगातार।

कलस्टर में करना है कार्य, तोखा लाईन है स्वीकार्य,

रियल टाइम मैप बनेगा जब, स्थिति होगी तब स्पष्ट।।


खेसरों के खानों को भरना, सिलसिलेवार नंबर है देना,

खानापुरी की यही है रीति, नक्शे के खानों की पूर्ति।

याददाश्त पंजी आधार, खेसरा पंजी हो तैयार,

खानापुरी पंजी निर्माण, एलपीएम देना है बाँट।।


दावा-आक्षेपों की सुनवाई, अधिकार-अभिलेख की करें तैयारी,

सफाई, मुकाबला और तरमीम, अंतिम प्रकाशन से पूर्व तरतीब।

अधिनियम में है प्रावधान, निर्धारित हो उचित लगान,

चार प्रतियों में अधिकार-अभिलेख, नियमावली में है उल्लेख।।


सूचना, शिक्षा और संचार, विशेष सर्वेक्षण के मुख्य आधार,

मार्गदर्शन की हो दरकार, एफएक्यू भी है तैयार।

अमीन हो या बंदोबस्त पदाधिकारी, सबकी निश्चित जिम्मेवारी,

आएँ ! मिलकर करें प्रयत्न, भू-विवाद का करने अंत।।


Friday, May 22, 2020

युवाशक्ति को नमन


 


शक्तिपूंज, जाज्वल्यमान

युवाशक्ति नक्षत्र समान

देश की है आन-बान

वीरता के कीर्तिमान

राग-द्वेष का शमन

शत्रु का करे दमन

युवाशक्ति को नमन।

ज्ञान में, विज्ञान में

सृजन, सम्मान में

समृद्धि सोपान में

स्वदेश की शान में

कभी नहीं रूके चरण

विकास के खिले चमन

युवाशक्ति को नमन।

खेत-खलिहान में

सूचना-तकनीक में

अंतरिक्ष उड़ान में

युद्ध के मैदान में

देश की शान में

निरंतर बहते स्वेदकण

युवाशक्ति को नमन।

लक्ष्य पर टिके नयन

बढ़े चले चपल चरण

शस्त्र भी और शास्त्र भी

देश में कायम अमन

प्रहरी है देश की

देश ही सेवा धरम

युवाशक्ति को नमन।।


Wednesday, May 20, 2020

संगीत है पाथेय





गायन, वादन, नृत्य का सुन्दर है संयोग
स्वर, ताल, लय का संगीत है योग
राग, भाव, मर्म का है मिश्रित प्रतीक
गंगा, यमुना, सरस्वती की धार है संगीत।

वेद की ऋचा है, सृष्टि का पर्याय
संतों की स्वर-साधना का है आराध्य
मन, आत्मा, हृदय की सहज है अनुभूति
भक्ति, मुक्ति, आत्मानुभूति का भाव है संगीत।

कवि की कविता है कल्पना की उड़ान
तनावमुक्त जीवन का संगीत है रामवाण
जड़-चेतन,पशु-पक्षी भी हो जाते हैं मंत्रमुग्ध
जीवन के हर मर्ज की उपयुक्त दवा संगीत।

योगी का योग है आसमान का मेघ
तर्क, विद्या-बुद्धि का संगीत है सुमेल
फूल की सुरभि और धरती की हरियाली
संगीत के सात सुरों में जीवन की खुशहाली।

जीवन की आपाधापी में कोई न दूजा मीत
स्थिर मन, हृदयशांति का साधन है संगीत
संगीत ही जीवन है, संगीत ही है ध्येय
सुख-शांतिमय जीवन का संगीत है पाथेय।।


Monday, May 18, 2020

अतुलित है भारत देश



रूप-रंग, जाति-धर्म, वेश-भूषा हैं अनेक,
हर रंग के हैं फूल खिले, उपवन है भारत देश।
विश्व-मानचित्र पर सुशोभित विभिन्न देश,
देशों का देश है, अतुलित है भारत देश।।

नदी-नाले, झरने-झील, वन प्रदेश है सुरम्य,
शस्य-श्यामला धरा, प्रहरी हिमालय अनन्य।
भरत-भूमि भारत है, धन-धान्य है अशेष,
ऋषियों की कर्मभूमि, देवभूमि भारत देश।।

शांति, सत्य, अहिंसा का बाँटता है संदेश,
आन-बान-शान पर मृत्यु का करे अभिषेक।
गाँधी की जन्मभूमि, कर्मभूमि है विशेष,
जाज्वल्यमान नक्षत्र है, आलोकित भारत देश।।

देश की रक्षा हेतु तत्पर है लाखों वीर,
चाहे हो रणभूमि, दुर्गम हो कारगिल।
अखण्ड है, नम्य है, अतुल्य है, एक है,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक है भारत देश।।

Saturday, May 16, 2020

जीवंत समाज बनाना है




बच्चे हैं भविष्य देश के

बचपन हमें बचाना है

नियोजकों से मुक्त कराकर

विद्यालय पहुँचाना है।

बालश्रम का कलंक मिटाकर

जीवंत समाज बनाना है।

छः से चौदह बरस के बच्चे

उम्र के कच्चे, मन के सच्चे

विद्यालय जब जाना होता

भेजे जाते ईंट के भट्ठे

दरी, कालीन से त्राण दिलाकर

शिक्षित उन्हें बनाना हैं।

जीवंत समाज बनाना है।

बच्चे हैं अरमान हमारे

गीता औ कुरान हमारे

गुरूग्रंथ बाइबिल हमारे

सजग देश की शान हमारे

स्नेह, प्रेम से आवेशित कर

आगे उन्हें बढ़ाना है।

जीवंत समाज बनाना है।

नीरस औ श्रमसाध्य जिंदगी

बच्चे ढ़ोते रहते हैं

बचपन बने पिता बचपन का

असमय बूढ़े होते हैं।

बालश्रम की घृणित प्रथा से

बच्चे शोषित होते हैं

बचपन की किलकारी को

वापस उन्हें दिलाना है।

जीवंत समाज बनाना है।

बच्चा, बचपन औ बालकपन

करता है यह यक्ष प्रश्न

गाँधी, लोहिया की कर्मभूमि में

कब होंगे पूरे स्वतंत्र

बालश्रम मुक्त समाज

कब प्रबल बनेगा प्रजातंत्र?

उत्तर खोजें, हम करें यत्न

देश की ‘मुस्कान’ बचाना है

जीवंत समाज बनाना है।।


Thursday, May 14, 2020

बहुत कष्ट होता है !



देतें है जन्म
बनाते हैं योग्य
सहते हैं दुख
सींचते हैं बगिया
बढ़ती है उम्र
झुकती कमर
बूढ़ी होती आँखें
मिलता तिरस्कार
नहीं मिलता है संतति 
का सहारा 
प्रेम और स्नेह 
भेजे जाते वृद्धाश्रम
फिर भी कहलाते श्रवण कुमार
बहुत कष्ट होता है !

कहलाते अभिन्न मित्र
दिखलाते अपनत्व
साथ देने की करते कसमे-वादे
बहाते घड़ियाली आँसू
पर करते विश्वासघात
आती जब विपत्ति
मदद की होती आस
तो खींचते हैं पैर
बनाते बहाने
करते हैं अहित
मुख में अमृत
हृदय में विष
फिर भी कहलाते मित्र
बहुत कष्ट होता है !

बड़े अरमानों से 
पालते हैं बेटी
देते हैं सामर्थ्य भर शिक्षा
बनाते हैं योग्य
ढूँढ़ने निकलते जब
कन्या हेतु योग्य वर
बाधक बनता है
दहेजरूपी दानव
करते हैं आदर्शवादी बातें
वर के पिता
दहेज की वेदी पर
देते आदर्शवाद को तिलांजलि
माँगते दान-दहेज
बहुत कष्ट होता है !

जीवनदायिनी गंगा में
फेंकते निर्माल्य
बहाते कचरा
धोते गंदे-मैले कपड़े
करते स्नान ध्यान
दर्शन, मंजन, पान
किनारे पर मनाते पिकनिक
फैलाते प्रदूषण
अविरलता में बनते बाधक
फिर भी करते गंगा आरती
बोलते हैं हर-हर गंगे
करते पूचा-अर्चना
लेते स्वच्छता की शपथ
तब बहुत कष्ट होता है !



Tuesday, May 12, 2020

ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग


         


ईश्वर की संतान हैं हमसब
जड़-चेतन हो या दिव्यांग
एक ही उपवन के खिले फूल
मानव-मानव सब एक समान
सर्वांग-दिव्यांग में भेदभाव
विकृत मानसिकता की पहचान
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग 

बुद्धि में, विवेक में, ज्ञान और विज्ञान में,
संपन्न करें हम उन्हें अवसर-अधिकार में
एकाकीपन का दंश न झेलें
और न सहे अपमान
मिलजुल कर हम उन्हें दिलाएँ
जीवन की मुस्कान
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग।

समाज के अभिन्न अंग
मुख्यधारा के घटक
दया-करूणा के पात्र नहीं
सम्मान के भूखे निःशक्त
शारीरिक संरचना नहीं
गुणों का हम करें बखान
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग।     
       
व्यक्ति का परिवार का
समाज का यही हो लक्ष्य
अवसर-अधिकार से दिव्यांगजन बने सशक्त
अष्टावक्र, सूरदास औ जायसी के कीर्तिमान
भरत भूमि भारत में, करें हम उन्हें सलाम
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग ।

Monday, May 11, 2020

बुजुर्ग-व्यथा




पुरजन-परिजन से नहीं मोह
वृद्धजनों से सतत् द्रोह
सामाजिकता का नहीं ज्ञान
कुतर्की, मनमौजी हो संतान
दिल की टीस बढ़ाता है
वह पुत्र नहीं रह जाता है।

स्वेद-बिन्दु के सिंचन से
अहर्निश भविष्य निर्माण हेतु
आजीवन करता है प्रयास
वह मृदुवाणी का आकांक्षी
जब वाक्शूल से बिंधता है
तब पुत्र नहीं रह जाता है।

सतत् संतति प्रेम निरत
स्व-सुख सुविधा से सतत् विरत
संतति को योग्य बनाता है
लेकिन जब मिलता तिरस्कार
जब हृदय रूदन-कंद्रन करता
तब पुत्र नहीं रह जाता है।

इच्छा ही दुख का कारण है
कम इच्छा कष्ट निवारण है
जीवन का है यह परम सत्य
जब पुत्र कुपुत्र बन जाता है
तब वारिस मात्र रह जाता है।
वह पुत्र नहीं कहलाता है।

Saturday, May 9, 2020

जल-हरियाली से ही जीवन

  
             

ग्लोबल वार्मिंग,वायु प्रदूषण,
जन-जीवन पर सकट भीषण,
अतिवृष्टि-अनावृष्टि से,
आशंकित,उद्वेलित जन-मन,
आशा की किरण बन आया,
जल-जीवन-हरियाली मिशन।

जल-स्त्रोतों की कर पहचान,
तालाब, पोखर, आहर-पइन,
अतिक्रमण मुक्ति है, पहला काम,
जन-मानस सब एक समान,
जीर्णोद्धार-पुनरुद्धार के बाद,
वृक्षारोपण है अनिवार्य।

एक एकड़ से कम हो क्षेत्र,
मनरेगा योजना होगा श्रेष्ठ,
अधिक यदि जलस्त्रोत का क्षेत्र,
लघु जल संसाधन विभाग सचेष्ट,
वाटर हार्वेस्टिंग कार्य महान 
जल-संरक्षण का दे पैगाम।

फसल-चक्र है अपनाना,
धन-धान्यए समृद्धि है पाना।
सीमित स्त्रोत का रखें ध्यान, 
सौर-ऊर्जा अनुपम वरदान।
प्लास्टिक से बड़ा नुकसान,
कपड़े की थैली अनुमान्य।।

माँ गंगे है जीवन-धारा
निर्मल रखना कर्तव्य हमारा।
भगीरथ प्रयत्न का सुनहरा फल,
मगध पहुँचेगा गंगा जल, 
जल-संचय करें आजीवन, 
जल-हरियाली से ही जीवन।

Friday, May 8, 2020

परिवर्तन है जीवन-धारा

                                                                       


सुखद-दुखद, चाही-अनचाही
घटनाएँ घटती अक्सर
कभी हास्य में, कभी रूदन में
सुख के क्षण में, दुख के मन में
इच्छाओं के मकड़जाल में
उलझा रहता है हरदम
अवसर देता है परिवर्तन
समझ नहीं पाता मानव-मन।

प्रकृति को परिवर्तन प्यारा
ऋतु-परिवर्तन बड़ा निराला
कभी पतझड़, कभी वसंत
परिवर्तन अतुलित आनंद
गर्मी कभी, बरसात कभी
आते-जाते शरद-हेमंत
प्रकृति का संदेश चिरंतन
परिवर्तन जारी आजीवन।

परिवर्तन है जीवन-धारा
उथल-पुथल, मीठा या खारा
महज संयोग नहीं परिवर्तन
यह तो है प्रारब्ध प्रबल
उन बातों पर व्यर्थ न सोचें
जिनपर चले न अपना वश
कर्त्तव्य-पथ पर सतत् अग्रसर
अपेक्षित होगा उसका फल।

परिवर्तन तो उत्प्रेरक है,
जीवन जीने का आधार 
श्रम, क्षमता के संबल से
कर सकते सपने साकार
कर्म-भाग्य के मध्य में किंचित
विचलित जब हो अंतर्मन
‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ हो
जीवन-पथ का मूलमंत्र।।

Thursday, May 7, 2020

उन कँधों को मत झुकने दो।




जन्म दिया, दुनिया दिखलाया
ऊँगली पकड़ चलना सिखलाया
जीवन की जटिल समस्याओं से
जिसने तुझे लड़ना सिखलाया,
आज वही कातर नयनों से
तेरी ओर निहार रहा है
झुकी कमर है, बूढ़ी आँखें
उन्हें शक्ति और संबल दो
उन कँधों को मत झुकने दो।

अपनी बगिया सींची जिसने
खून-पसीना खूब बहाया
सुख-दुख में आह्लादित रहकर
तुमको जीने योग्य बनाया
आज वही टकटकी लगाकर
प्रेम-स्नेह को तरस रहा है
बगिया के उस माली को
फल खाने का अवसर दो
उन कँधों को मत झुकने दो।

हाथ उठाए सिर्फ दुआ के
स्नेह-सिक्त हैं वाणी जिनके
दुआओं की इस अनुपम झोली से
जीवन को आलोकित कर लो
राम-श्रवण की पितृभक्ति से
सीखो, जीवन सफल करो
जीवन के अंतिम पड़ाव पर
उन्हें कष्ट मत सहने दो
उन कँधों को मत झुकने दो।

जो जितना देता, पाता है
जीवन का यह ऋजु नाता है
तेरी संतति देख रही है
प्लानिंग अपनी बना रही है
नियति-चक्र से डरकर भी तो
मातु-पिता से प्रेम करो
उठो, बनो उनकी लाठी तुम
उन्हें सशक्त सहारा दो
उन कँधों को मत झुकने दो।।

Wednesday, May 6, 2020

माँ कभी बूढ़ी नहीं होती




ममता की सूरत होती
ईश्वर की सूरत होती
औलाद की दौलत होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।

रत्नगर्भा जननी होती
कन्हैया की यसुमति होती
राम की कौशल्या होती
देवों की अनुसूया होती
जीजाबाई, बा और टेरेसा होती
भोली-भाली गैया होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।

दुआओं की झोली होती
नौनिहालों की लोरी होती
सबकी मुँहबोली होती
बरगद की छाया होती
अम्मा, बीजी और अंबा होती
जननी जगदम्बा होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।

त्याग की नसीहत होती
पूजा-इबादत होती
कुदरत का करिश्मा होती
अजर-अमर नगमा होती
सरस्वती, गौरी, पद्मा होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।।


Tuesday, May 5, 2020

आओ मिलकर करें पढ़ाई


एक ट्रेन में सफर कर रहे थे,
स्लम के बच्चे, शहर के बच्चे,
बातों-बातों में वे खोले,
अपने मन के कच्चे चिट्ठे।।

हम उठते हैं सुबह-सबेरे,
करते घर की साफ-सफाई,
हम से ही तो चलता है,
घर का खर्चा, हे मेरे भाई!

हम भी उठते आँखे मींचे,
भारी-भरकम बस्ता ढ़ोते,
मम्मी-पापा करे चढ़ाई,
अब बस आई, तब बस आई।।

हम तो देखें माल-मवेशी,
करनी पड़ती गोबर-करसी,
मन तो करता करें पढ़ाई,
हम भी बाँधें काॅलर-टाई।

अब सबको मालूम है भाई,
‘सर्व शिक्षा अभियान’ की अच्छाई,
स्लम के बच्चे, शहर के बच्चे,
हम सब तो है भाई-भाई,
आओ! मिलकर करें पढ़ाई।।

Monday, May 4, 2020

बेटी को आगे बढ़ना है ।




बेटी होती उड़ती चिड़ियाँ
छूना चाहे नभ का कोना
नभ छूने के प्रगति.मार्ग पर
बाधक कभी न बनना है
स्वर्णिम उसके पर.पंखों को
गतिमान हमें अब करना है
हर बंधन से मुक्त कराकर
खुली हवा में उड़ना है
बेटी को आगे बढ़ना है।
बेटी होती बहती नदिया
कलकल.छलछल अविरल निर्मल
चट्टानों में राह बनाती
खेतों में हरियाली लाती
निरंतर हरपल बहती रहकर
जन.जीवन का कष्ट मिटाती
नदिया.बिटिया के संघर्ष में
हमें सहायक बनना है
बेटी को आगे बढ़ना है।

बेटी होती मैत्रेयी.गार्गी
अरूंधती औ इन्द्रानूयी
कभी बछेन्द्रीए कभी कल्पना
अंतरिक्ष में पैर जमाती
कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है
जहाँ नहीं वह टक्कर देती
मंजिल पाने की मुहिम में
प्रेरक हमें अब बनना है
बेटी को आगे बढ़ना है।
बेटी है बाबुल की गुड़िया
माँ की सखिया होती बेटी
भाई की मुँहबोली बहना
हर घर की अरमान है बेटी
हर बेटी के भाग्य में पापा
हर पापा के भाग्य न बेटी
सीढ़ियाँ अब पड़ती हैं छोटी
छलांग उसे लगाना है
बेटी को आगे बढ़ना है।
बेटी होती घर की आभा
घर की वह किलकारी होती
शक्ति स्वरूपा दुर्गा होती
घर की लक्ष्मी होती बेटी
आंगन की तुलसी है बेटी
दो कुलों का मान है बेटी
यथार्थ है जीवन की बेटी
स्वीकार इसे अब करना है
बेटी को आगे बढ़ना है।
गीता और कुरान है बेटी
है गुरूवाणी वाइबिल भी है
अनुपम वेद.पुराण है बेटी
सुख.दुख की संगिनी है बेटी
जीवन का पायेय है बेटी
कण्व.शकुंतलाए विदेह.वैदेही
हिमगिरि की गौरी है बेटी
बेटी के सत्कर्मों पर 
अभिमान हमें अब करना है
बेटी को आगे बढ़ना है।

भागलपुर गान।




बिहार मानचित्र पर नक्षत्र जाज्वल्यमान
भागलपुर जिला है राज्य का हृदयस्थान
बिहुला-विषहरी स्थल, प्राचीन बूढ़ानाथ
खानकाह शहबाजिया, प्रचलित है गोनूधाम
विक्रमशिला विश्वविद्यालय अब भी करे कीर्तिगान
रेशम की नगरी है, कांवरिया का परमधाम
भागलपुर है महान।



शस्य-श्यामला धरा, कतरनी की महक-मिठास
आम्र-मंजरी सुरभि, जर्दांलू, गुलाबखास
जैन मंदिर शोभित है, हजरत मांगन शाह की मजार
शरत् की साहित्य भूमि, कर्ण की कर्मभूमि
हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिशाल पवित्रभूमि
उत्तरवाहिनी गंगा आस्मिता की पहचान
भागलपुर है महान।
तिलकामांझी देशभक्त, राष्ट्रकवि दिनकर
राम मोहन राय भी रहे यहाँ सेवारत
टैगोर की टिल्हाकोठी, प्रसिद्ध कुप्पाघाट
समृद्ध मंजूषा कला, घर-घर में ख्याति प्राप्त
गरूड़ का निवास स्थान, डाॅल्फिन का परमधाम
जयप्रकाश उद्यान में जन-जन के बसे प्राण
भागलपुर है महान।
सांस्कृतिक विविधता, गौरवमय है अतीत
स्वतंत्रता सेनानी पैदा हुए शूरवीर
साम्प्रदायिक सौहार्द्र का स्थापित कीत्र्तिमान
ईद-होली संग मनाए, हिन्दु औ मुसलमान
विद्या का केन्द्र है, मनीषियों ने धरे ध्यान
धरहरा भी यहाँ, बेटियाँ पातीं सम्मान
भागलपुर है महान।
गंगा के कल-कल में
पक्षी के कलरव में
मंदिर ओ मस्जिद में
चर्च-गुरूद्वारा में
जन-जन सुनें यही तान
अमन-चैन सुबह-शाम
मिलजुलकर हम बढ़ें
घर-घर में सुख-शांति
भागलपुर है महान।।