Saturday, October 22, 2022

सौन्दर्य-बोध

 
तन-मन को करता आनंदित

पुलकित करता अंतर्मन

पल-पल परिलक्षित परिवर्तन

सौन्दर्य है मानव गुण-धर्म

रुचि, संस्कार परिवेश आधारित

निर्मल-धवल, अप्रतिम, अनुपम ।

सौन्दर्य शक्ति, प्रेरणा-श्रोत

सद्गुण, सौहार्द्र से ओतप्रोत

नैतिक गुणों की है परख

मानव मूल्यों का मुकुलित सरोज

करुणा, दया, प्रेम का संगम

मन–वचन-कर्म सुंदर संयोग।

सौन्दर्य नहीं त्वचा का रंग

सौम्य, सुखद है भाव-तरंग

सौन्दर्य सजावट का विलोम

कथमपि नहीं कृत्रिम बहिरंग

सौन्दर्य सत्य, शिव, औ सुंदर

आंतरिक सौन्दर्य ही सर्वोत्तम ।

सौन्दर्य है शिक्षा-दीक्षा

मानव-मूल्यों की संरक्षा

कर्तव्य-बोध की कर्मठता

कथनी–करनी में उज्ज्वलता

नयन-सुख की नहीं आकुलता

मानव-जीवन की सार्थकता ।

सौन्दर्य व्यक्तित्व, सौन्दर्य चरित्र

सौन्दर्य अलौकिक परिधान

हृदयागत भाव में है निहित

आंतरिक सौन्दर्य ही दीप्तिमान

मृग-मरीचिका का करें त्याग

सौन्दर्य-शक्ति का मान-सम्मान ।।