तन-मन को करता आनंदित
पुलकित करता अंतर्मन
पल-पल परिलक्षित परिवर्तन
सौन्दर्य है मानव गुण-धर्म
रुचि, संस्कार परिवेश आधारित
निर्मल-धवल, अप्रतिम, अनुपम
।
सौन्दर्य
शक्ति, प्रेरणा-श्रोत
सद्गुण, सौहार्द्र
से ओतप्रोत
नैतिक
गुणों की है परख
मानव
मूल्यों का मुकुलित सरोज
करुणा,
दया, प्रेम का संगम
मन–वचन-कर्म
सुंदर संयोग।
सौन्दर्य नहीं त्वचा का रंग
सौम्य, सुखद है भाव-तरंग
सौन्दर्य सजावट का विलोम
कथमपि नहीं कृत्रिम बहिरंग
सौन्दर्य सत्य, शिव, औ सुंदर
आंतरिक सौन्दर्य ही सर्वोत्तम
।
सौन्दर्य
है शिक्षा-दीक्षा
मानव-मूल्यों
की संरक्षा
कर्तव्य-बोध
की कर्मठता
कथनी–करनी
में उज्ज्वलता
नयन-सुख की
नहीं आकुलता
मानव-जीवन
की सार्थकता ।
सौन्दर्य व्यक्तित्व, सौन्दर्य
चरित्र
सौन्दर्य अलौकिक परिधान
हृदयागत भाव में है निहित
आंतरिक सौन्दर्य ही
दीप्तिमान
मृग-मरीचिका का करें त्याग
सौन्दर्य-शक्ति का मान-सम्मान
।।

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