कृषि की अधिष्ठात्री देवी
हल से नि:सृत है रेखा
मैथिली, मिथिला की पुत्री
लक्ष्मी रूपा, राम प्रिया
नारी सम्मान की संरक्षक
जनकनंदिनी भूमिसुता ।
सुख-धन-वैभव त्याग कर
वरण राम पद चिह्न
राम-लखन संग वनगमन
सीता शक्तिपूंज
पतिव्रता, नारायणी
सीता-राम अभिन्न ।
माया की सीता हरण
दशानन मन में खोट
तनिक नहीं विचलित हुई
असुर-शक्ति सम खद्योत
अग्नि परीक्षा में सफल
तृण धरि सीता ओठ ।
सीता है संकल्प-शक्ति
सीता है संघर्ष
सीता जननी, अग्रणी
सीता है आदर्श
त्याग, सादगी, शुद्धता
सीता सचमुच नारी दर्प ।
सृजन हार हैं सृष्टि के
नर नारी समरूप
यक्ष प्रश्न है अनुत्तरित
उपेक्षित कबतक नारी शक्ति?
कबतक होगी अग्निपरीक्षा ?
बंधन से कब होगी मुक्त ?