Friday, July 28, 2023

मोटे अनाज का करें प्रयोग


ज्वार-बाजरा गायब थाली से 

चावल-गेहूं बना आहार 

पोषक तत्व से परिपूर्ण बाजरा 

शोध-खोज से है स्वीकार्य 

मानव स्वास्थ्य हेतु हितकारी 

मोटा अनाज है अनिवार्य । 

कृषि जैव विविधता में सहायक 

ज्वार-बाजरा संग रागी 

रोग प्रतिरोधक रक्षा कवच है 

मानव मित्र सुपाच्य गुणकारी 

'अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष’ में 

मिलेट जनित अनाज से जोड़ें यारी । 

कोविड की विनाश लीला के बाद 

कंपनियों ने खोजे विकल्प 

मिलेट- जनित उत्पाद निर्माण का 

नीतिगत निर्णय का संकल्प 

मोटा अनाज आधारित उत्पाद का 

प्रतिस्पर्धा ओ होड़ सर्वत्र । 

नव सृजन परिवर्तन की वेला 

नव अन्वेषण, नव-नव खोज 

पर्यावरण रक्षक, संवर्धक 

मोटे अनाज का करें प्रयोग 

कम गेहूं और अधिक बाजरा 

संकल्पित हों हम सब लोग ।। 

Wednesday, April 12, 2023

ॐ जगत का मूलाधार


शिवशंकर के मुख से निःसृत

ॐ से सृजित है सगर संसार

उपनिषद का है आरंभ-अंत 

ॐ जगत का मूलाधार 

सकारात्मकता का संचार-मंत्र 

ॐ मानव कुल कंठहार । 

वेदों का मूल है, ॐ है सृजन

ॐ ही सृष्टि है, ॐ ही वरण

ॐ ही ध्वनि है, ॐ ही ब्रह्मांड

ॐ ही ऊर्जा है, सकल वेद-पुराण

एकाक्षर में सर्वस्व समाहित

ॐ ब्रह्म तत्व ज्ञान-विज्ञान ।

विधि-हरि-हर सुर सर्व है 

ॐ है कर्म, प्रबल कर्तव्य

ॐ सायक, वाण भी है 

ॐ ही है परम लक्ष्य 

सभी धर्मों का सार है 

ॐ ही है जीवन तथ्य ।

  पत्रम्, पुष्पम्, फलम्, ॐ

उच्च चेतना का है श्रोत

योग, ध्यान ,अभ्यास है

नाश करता मन दोष

ॐ सद्यःब्रह्म ज्योति

       ॐ जागृत रश्मि-प्रद्योत ।।


Tuesday, April 4, 2023

आकर्ष-आकर्षक

घर-आँगन की रौनक है

करता हरदम सैर-सपाटा

नंद के लाल सदृश लीला

कभी ज्वार और कभी भाटा

सबका प्यारा,राज-दुलारा

आकर्ष अद्भुत और निराला ।

                        भय नहीं डांट-डपट का किंचित

                        आन-बान का नहीं पता

                        हरपल-हर क्षण चंचल-सा मन

                        मधुर हास मन आनंद दाता

                        हर्षित-पुलकित पुरजन-परिजन

                        आकर्ष की अनुपम बाल अदा ।

निर्मल-निश्छल है मुखमण्डल

काले बाल सम काली घटा

धमा-चौकड़ी इधर-उधर

अस्तव्यस्त घर रहे सदा

माँ के आँचल मे छुप जाए

हमने तो कुछ नहीं किया ।

                        बाल अदा से वारी-न्यारी

                        माँ-दादी का दुख दर्द मिटा

                        तनाव भंजक आकर्ष-आकर्षक

                        नाना बिसरे व्याधि-व्यथा

                        आनंदित हैं दादा शशि-सम

                        निरखि बाल कृष्ण लीला ।

आकांक्षा-तुषार के जिगर का टुकड़ा

आकर्ष पर बरसे आशीष सदा

आशीर्वाद का है आकांक्षी

सब दें इसे आशीष–दुआ

सबके आँगन गूँजे किलकारी

ईश्वर की सबपर सदा कृपा ।।

Thursday, March 30, 2023

खुशी: अंतर्मन की ऊर्जा


खुशी
है अंतर्मन की ऊर्जा
खुशी नहीं है बाह्य पदार्थ
भौतिकता से कभी न संभव
मुदित-मन खुशी का राज
प्राप्त वही पर्याप्त जीवन में
अनंत इच्छा से होती व्याधि
आवश्यकता-इच्छा में अंतर से
सुखमय जीवन, खुशी की प्राप्ति ।
                            खुशी तो रंग-विरंगी तितली
                            पीछा कर मिलता है कष्ट
                            धैर्य मात्र अवलंब मनुज का
                            खोज खुशी की सचमुच व्यर्थ
                            सरल जीवन, सदविचार की
                            जग में होती श्रद्धा-कद्र
                            जागृत कर सकारात्मक ऊर्जा
                            सुख-शांति सुलभ सर्वत्र ।
अंतर्मन में ही टटोलना
सुख-शांति, खुशी की राह
परोपकार-उपकार है माध्यम
प्रकृति परिवर्तन की दरकार
माया-मोह से दूर खुशी
मायापति खोलें खुशी के द्वार
स्थितप्रज्ञता है श्रेयस्कर
अल्प इच्छा जीवन आधार ।
                        जीवन सुख-दुख का है संगम
                        हास्य-रुदन का हो आलिंगन
                        समय-चक्र-चालित है जीवन
                        वक्त प्रबल व्यक्ति अकिंचन
                        खुशी कर्मफल भोग चिरंतन
                        हार-जीत का हो अभिनंदन
                        ईश्वर इच्छा ही हृदयंगम
                        खुशी और गम ही जीवन-दर्शन ।।

Tuesday, March 7, 2023

कवि-कुल-केहरि कालिदास


वैदर्भी रीतिक कविकुल गुरु

साहित्य क्षितिज केर अलंकार  

जीवन दर्शनक विविध रूप

पौराणिक कथा लेखन आधार

साहित्य मे संगीतक समावेश

कविता, नाटक, कामिनी विलास

आदर्शवादी परंपरा शृंगार-रस संग

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

रघुकुल राजा लोकनिक वर्णन

‘रघुवंशम्’ अद्वितीय महाकाव्य

पुरुरवा-उर्वशीक प्रेमक चित्रण

‘विक्रमोर्वशीयम्’ नाटकक कथा-सार

प्रकृतिक मानवीकरण ‘मेघदूतम्’ मे

यक्ष-मेघ सरस संदेश संवाद

‘ऋतुसंहारम्’ मे षट्ऋतु वर्णन

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

शकुंतला-दुष्यंतक प्रेम आधार

‘अभिज्ञानशाकुंतलम' शाश्वत कृति

अग्निमित्र-मलविकाक प्रेम प्रबल

साहित्यक मणिमाला ‘मालविकाग्नि मित्र’

‘कुमारसम्भवम्’ कार्तिकेयक जन्म गाथा

‘ज्योतिर्विदभरणम्’ अति विशिष्ट

साहित्यक विधा सभ आत्मसातं

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

ज्ञान-विज्ञान ओ विधि-दर्शन

प्रवाह प्राज्जलता विद्यमान

सांस्कृतिक चेतना केर संवाहक

ध्वनि-अर्थक सद्यः तादात्म्य

‘त्वमेवाहं’ केर वरद पुत्र

साहित्य-सलिल सरसिज समान

मुख-मंडल पर सरस्वती वास

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।।

Thursday, January 5, 2023

नव-पुरातन


शाश्वत-सनातन, नूतन-पुरातन

हर पल, हर क्षण, नव अन्वेषण

क्षण में नूतन, क्षण में पुरातन  

नव-पुरातन, जीवन आभूषण ।

         समय चक्र, परिवर्तित जीवन

         बीता पल-क्षण, अंश पुरातन

         वक्त की सत्ता जारी आजीवन

        नित्य नवल औ’ चंचल जीवन ।

परिवर्तन लक्षित संवर्धन

प्रकृति को प्रिय है परिवर्तन

पतझड़ अनुवर्ती वसंत आकर्षण  

परिवर्तन आनंद का दर्पण ।  

        जीवन-ध्वनियाँ नव-पुरातन

        सुख- दुख का अनवरत प्रक्रम

        पुरातन निसृत है नवीनतम

        जीवन मणियाँ नव-पुरातन ।

नव-पुरातन जीवन-दर्शन

कर्म-पथ पर जीवन अर्पण

मन अश्व सम, सतत नियंत्रण

नव-पुरातन हो हृदयंगम ।।