Tuesday, March 7, 2023

कवि-कुल-केहरि कालिदास


वैदर्भी रीतिक कविकुल गुरु

साहित्य क्षितिज केर अलंकार  

जीवन दर्शनक विविध रूप

पौराणिक कथा लेखन आधार

साहित्य मे संगीतक समावेश

कविता, नाटक, कामिनी विलास

आदर्शवादी परंपरा शृंगार-रस संग

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

रघुकुल राजा लोकनिक वर्णन

‘रघुवंशम्’ अद्वितीय महाकाव्य

पुरुरवा-उर्वशीक प्रेमक चित्रण

‘विक्रमोर्वशीयम्’ नाटकक कथा-सार

प्रकृतिक मानवीकरण ‘मेघदूतम्’ मे

यक्ष-मेघ सरस संदेश संवाद

‘ऋतुसंहारम्’ मे षट्ऋतु वर्णन

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

शकुंतला-दुष्यंतक प्रेम आधार

‘अभिज्ञानशाकुंतलम' शाश्वत कृति

अग्निमित्र-मलविकाक प्रेम प्रबल

साहित्यक मणिमाला ‘मालविकाग्नि मित्र’

‘कुमारसम्भवम्’ कार्तिकेयक जन्म गाथा

‘ज्योतिर्विदभरणम्’ अति विशिष्ट

साहित्यक विधा सभ आत्मसातं

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।

ज्ञान-विज्ञान ओ विधि-दर्शन

प्रवाह प्राज्जलता विद्यमान

सांस्कृतिक चेतना केर संवाहक

ध्वनि-अर्थक सद्यः तादात्म्य

‘त्वमेवाहं’ केर वरद पुत्र

साहित्य-सलिल सरसिज समान

मुख-मंडल पर सरस्वती वास

कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।।

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