खुशी है अंतर्मन की ऊर्जा
खुशी नहीं है बाह्य पदार्थ
भौतिकता से कभी न संभव
मुदित-मन खुशी का राज
प्राप्त वही पर्याप्त जीवन में
अनंत इच्छा से होती व्याधि
आवश्यकता-इच्छा में अंतर से
सुखमय जीवन, खुशी की प्राप्ति ।
साहित्य क्षितिज केर अलंकार
जीवन दर्शनक विविध रूप
पौराणिक कथा लेखन आधार
साहित्य मे संगीतक समावेश
कविता, नाटक, कामिनी विलास
आदर्शवादी परंपरा शृंगार-रस
संग
कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।
रघुकुल
राजा लोकनिक वर्णन
‘रघुवंशम्’
अद्वितीय महाकाव्य
पुरुरवा-उर्वशीक
प्रेमक चित्रण
‘विक्रमोर्वशीयम्’
नाटकक कथा-सार
प्रकृतिक
मानवीकरण ‘मेघदूतम्’ मे
यक्ष-मेघ
सरस संदेश संवाद
‘ऋतुसंहारम्’
मे षट्ऋतु वर्णन
कवि-कुल-केहरि
छथि कालिदास ।
शकुंतला-दुष्यंतक प्रेम आधार
‘अभिज्ञानशाकुंतलम' शाश्वत
कृति
अग्निमित्र-मलविकाक प्रेम
प्रबल
साहित्यक मणिमाला
‘मालविकाग्नि मित्र’
‘कुमारसम्भवम्’ कार्तिकेयक
जन्म गाथा
‘ज्योतिर्विदभरणम्’ अति
विशिष्ट
साहित्यक विधा सभ आत्मसातं
कवि-कुल-केहरि छथि कालिदास ।
ज्ञान-विज्ञान
ओ विधि-दर्शन
प्रवाह प्राज्जलता
विद्यमान
सांस्कृतिक
चेतना केर संवाहक
ध्वनि-अर्थक
सद्यः तादात्म्य
‘त्वमेवाहं’
केर वरद पुत्र
साहित्य-सलिल
सरसिज समान
मुख-मंडल
पर सरस्वती वास
कवि-कुल-केहरि
छथि कालिदास ।।