Wednesday, April 12, 2023

ॐ जगत का मूलाधार


शिवशंकर के मुख से निःसृत

ॐ से सृजित है सगर संसार

उपनिषद का है आरंभ-अंत 

ॐ जगत का मूलाधार 

सकारात्मकता का संचार-मंत्र 

ॐ मानव कुल कंठहार । 

वेदों का मूल है, ॐ है सृजन

ॐ ही सृष्टि है, ॐ ही वरण

ॐ ही ध्वनि है, ॐ ही ब्रह्मांड

ॐ ही ऊर्जा है, सकल वेद-पुराण

एकाक्षर में सर्वस्व समाहित

ॐ ब्रह्म तत्व ज्ञान-विज्ञान ।

विधि-हरि-हर सुर सर्व है 

ॐ है कर्म, प्रबल कर्तव्य

ॐ सायक, वाण भी है 

ॐ ही है परम लक्ष्य 

सभी धर्मों का सार है 

ॐ ही है जीवन तथ्य ।

  पत्रम्, पुष्पम्, फलम्, ॐ

उच्च चेतना का है श्रोत

योग, ध्यान ,अभ्यास है

नाश करता मन दोष

ॐ सद्यःब्रह्म ज्योति

       ॐ जागृत रश्मि-प्रद्योत ।।


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