उम्मीदों की
तिलांजलि में ही
संबंधों की
दुनिया निर्भर होती
उपयोगिता आधारित
होते संबंध
व्यक्तित्व की गणना नहीं होती
विचित्र होते
हैं मानवीय संबंध
परिवर्तनशील
इसकी प्रकृति होती ।
सुख में संबंधों की आती है बाढ़
दुख ही इसकी सही कसौटी होती
बेजान होते हैं दिखावटी संबंध
आत्मीयता तनिक भी नहीं होती
नाजुक-सी होती है संबंध की डोर
आघात सहने की आदी नहीं होती ।
हर संबंध फल दे जरूरी
नहीं
छाया भी मयस्सर
नहीं होती
इच्छा में
सन्निहित है कष्ट
सीमित इच्छा दुखदायी
नहीं होती
अस्मिता की
रक्षा सर्वोपरि सदा
संबंध ढोने की
बाध्यता नहीं होती ।
कुछ अच्छे भी लोग हैं जग में
जिनपर टिकी निगाहें होतीं
त्याग, सहयोग आधारित हैं संबंध
प्राप्ति की प्रत्याशा कष्ट ही देती
संबंध विश्वास-शुचिता पर निर्भर
खंडित संबंध की समीक्षा नहीं होती ।।

No comments:
Post a Comment