जन्म दिया, दुनिया दिखलाया
ऊँगली पकड़ चलना सिखलाया
जीवन की जटिल समस्याओं से
जिसने तुझे लड़ना सिखलाया,
आज वही कातर नयनों से
तेरी ओर निहार रहा है
झुकी कमर है, बूढ़ी आँखें
उन्हें शक्ति और संबल दो
उन कँधों को मत झुकने दो।
अपनी बगिया सींची जिसने
खून-पसीना खूब बहाया
सुख-दुख में आह्लादित रहकर
तुमको जीने योग्य बनाया
आज वही टकटकी लगाकर
प्रेम-स्नेह को तरस रहा है
बगिया के उस माली को
फल खाने का अवसर दो
उन कँधों को मत झुकने दो।
हाथ उठाए सिर्फ दुआ के
स्नेह-सिक्त हैं वाणी जिनके
दुआओं की इस अनुपम झोली से
जीवन को आलोकित कर लो
राम-श्रवण की पितृभक्ति से
सीखो, जीवन सफल करो
जीवन के अंतिम पड़ाव पर
उन्हें कष्ट मत सहने दो
उन कँधों को मत झुकने दो।
जो जितना देता, पाता है
जीवन का यह ऋजु नाता है
तेरी संतति देख रही है
प्लानिंग अपनी बना रही है
नियति-चक्र से डरकर भी तो
मातु-पिता से प्रेम करो
उठो, बनो उनकी लाठी तुम
उन्हें सशक्त सहारा दो
उन कँधों को मत झुकने दो।।

Exemplary!!!
ReplyDeleteVery nice lesson.
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