Monday, August 2, 2021

श्रम शक्ति

श्रम ही शक्ति, श्रम ही पूजा

इसका कोई विकल्प न दूज़ा

श्रम शक्ति दुनिया को प्यारी

कभी जाए न मेहनत ख़ाली

पत्थर काट बनती है राह

दशरथ माँझी बने सरताज ।

                    श्रम से ही सपने साकार

                    सफल जीवन का आधार

                    चींटी चलती कोशों दूर

                    आलस्य उसे नहीं मंजूर

                    श्रम शक्ति अनुपम, अनमोल

                    श्रम से बदले भाग्य योग ।

श्रम से कृषक उगाते अन्न

देश बने सक्षम-संपन्न

श्रम ही साधन, श्रम ही ध्येय

जीवन पथ का है पाथेय

श्रम से ज्ञान, श्रम से विज्ञान

श्रम से पूर्ण आस-अरमान ।

                    श्रम से जी चुराना पाप

                    बिना श्रम जीवन अभिशाप

                    श्रम से सुलझे बिगड़े काम

                    श्रम ही संज्ञा और सर्वनाम

                    वेद-पुराण का अंतर्निहित मंत्र

                    श्रम ही जीवन का मूलमंत्र ।।

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