सुबह-सबेरे अमृत बेला
करती प्रकृति आनंद की वर्षा
दैवीय शक्तियाँ होती जागृत
शुद्ध हवा जन-तन-मन हर्षित
ब्रह्ममुहुर्त में दृश्य सुहावन
वातावरण अतिशय मनभावन।
उषाकाल शुरूआती मौसम
देते हमें प्राकृतिक पोषण
साहित्य, संगीत, रचनात्मक विचार
सुबह-सबेरे की सौगात
भक्तजनों का अर्चन-वंदन
लेखन कार्य हेतु समय सर्वोत्तम।
मंद-मंद सुरभित बयार
नई शक्ति, ऊर्जा संचार
गीत-संगीतकार करते रियाज
शांत चित्त, मन एकाग्र
सुबह उठकर करना काम
सुख-समृद्धि का नव-विहान।
सूर्य लालिमा का करें हम स्वागत
पुष्पित बाग, खगवृंद के कलरव
वृद्ध, युवा, अन्नदाता किसान
उषाकाल सबका वरदान
प्रातः भ्रमण का सबको लाभ
विद्यार्थी, साधक करें अभ्यास।
सुबह-सुबह बिस्तर का त्याग
तनावमुक्त, अच्छे संस्कार
जल्दी सोकर उठना तड़के
सकारात्मकता जीवन में भर दे
प्रातः उठने का लें संकल्प
जीवन का होगा कायाकल्प।।

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