Saturday, July 10, 2021

गामक शीतल बसात

थाकल-हारल सदिखन मोन

शहरक जिनगी कान बिनु सोन

आपाधापी ओ भागमभाग

अपन गीत, अपन राग 

अपनापनक आस मतिभ्रम

दुःख मे दुर्लभ भेटब संग 

एकहि विकल्प एक गोट आस 

गामक बाट, गामक ठाठ

शहरक हवा सँ सरिपहुँ

नीक गाम-घरक बसात ।

                    शहरक जिनगी फ़्लैट मे सिमटल

                    दूरक पड़ोसी, यंत्रवत जिनगी

                    सभ किछु उपलब्ध मुदा

                    अपस्यात लोकसभ

                    चैन नहि जिनगी मे

                    आपकता अछि सिकुड़ल

                    गाम-घरक जिनगी थिक

                    प्रकृतिक सनेश-अथाह

                    शहरक जिनगी सँ सरिपहुँ

                    नीक गामक शीतल बसात ।

शहर जकाँ गाममे सेहो

ईर्ष्या-द्वेष, राग-विराग

प्रतिस्पर्धा, ओदौदक संग 

आडंबर, मिथ्या अलाप

इंसानियत जीवंत दृष्टिगत

सहयोग, त्याग, उपकार

दुःख मे मदतिक लेल अग्रसर

बीसरि पुरनका बात

शहरक दवाय सँ बेसी हितकर

गाम-घरक मलय बसात ।

                    ऊँच घर पक्का कंक्रिटक

                    चौरगर चमकैत बाट सपाट

                    राति जगमग दिन जकाँ

                    फ़्लाईओवरक सगरे जाल

                    गामक आनंद कतय शहर मे

                    प्रदूषण सँ वातावरण व्याप्त

                    देशक आत्मा बसल गाम मे

                    सर्वविदित अछि, सर्वज्ञात

                    शहरक जिनगी ज़ँ अछि उत्तम 

                    अति उत्तम गाम-घरक बसात ।।







No comments:

Post a Comment