श्वेत-धवल चादर अवनी पर
ऊपर नील-धवल आकाश
ऋतु शरद का शुभ आगमन
विदा होती है जब बरसात
धरती कास-कमल आच्छादित
मंद-सुवासित बहे बयार।
दिन छोटे और रातें लंबी
वातावरण समशीतोष्ण
चन्द्रमा की अमृत वर्षा
'जीवेम् शरदः शतम्'
नव-उत्साह सृजन परिचायक
पुलकित जन-मन, अंग-तरंग।
घनी घास,
हरीतिमा मखमली
अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य
ताल-तड़ाग की छटा मनोहर
शरद पूर्णिमा दिन त्राटक
कमल-दल सुरभि संवाहक
मनभावन है ऋतु शरद।
शीतकाल का द्वार खोलकर
लाती शरद पर्व-त्योहार
दशहरा,
दीवाली,
विश्वकर्मा पूजा
कोजागरा में हर्ष-उल्लास
हरसिंगार पुष्प की वर्षा
धान की बाली, फूले कास।
परिवर्त्तन नियम प्रकृति का
ऋतु-परिवर्त्तन है संकेत
उमस और वर्षा से निःसृत
नई ऊर्जा,
नव परिवेश
स्वच्छ,
धवल,
आचरण हो निर्मल
शरद-ऋतु का शाश्वत संदेश।।

शरद् त्रृतुआगमन के सुन्दर सटीक भावना,
ReplyDeleteधन्यवाद
शरदॠतु के आगमन का अति सुन्दर चित्रण.धन्यवाद
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