Friday, August 7, 2020

शरद-सौंदर्य


श्वेत-धवल चादर अवनी पर

ऊपर नील-धवल आकाश

ऋतु शरद का शुभ आगमन

विदा होती है जब बरसात

धरती कास-कमल आच्छादित

मंद-सुवासित बहे बयार। 

दिन छोटे और रातें लंबी

वातावरण समशीतोष्ण

चन्द्रमा की अमृत वर्षा

'जीवेम् शरदः शतम्'

नव-उत्साह सृजन परिचायक

पुलकित जन-मन, अंग-तरंग।

घनी घास, हरीतिमा मखमली

अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य

ताल-तड़ाग की छटा मनोहर

शरद पूर्णिमा दिन त्राटक

कमल-दल सुरभि संवाहक

मनभावन है ऋतु शरद।

शीतकाल का द्वार खोलकर

लाती शरद पर्व-त्योहार

दशहरा, दीवाली, विश्वकर्मा पूजा

कोजागरा में हर्ष-उल्लास

हरसिंगार पुष्प की वर्षा

धान की बाली, फूले कास।

परिवर्त्तन नियम प्रकृति का

ऋतु-परिवर्त्तन है संकेत

उमस और वर्षा से निःसृत

नई ऊर्जा, नव परिवेश

स्वच्छ, धवल, आचरण हो निर्मल

शरद-ऋतु का शाश्वत संदेश।।


2 comments:

  1. शरद् त्रृतुआगमन के सुन्दर सटीक भावना,
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. शरदॠतु के आगमन का अति सुन्दर चित्रण.धन्यवाद

    ReplyDelete