कोई कहे मिले सद्गति
कोई करे शत-शत नमन
कोई कहे ‘रेस्ट इन पीस’
शोक-संवेदना का अनवरत क्रम
वह क्या कहे,क्या करे
उजड़ गया जिसका चमन
जिस पर बीते,वही तो जाने
दुःस्सह पीड़ा करे सहन।
बड़े जतन से बाग लगाया
पुष्पित हुआ आँचल-दामन
सुखद भविष्य का सपना सँजोए
आनंदित था हर पल हर क्षण
कहाँ कौन-सी चूक हुई पर
बिखर गया सुंदर घर-आँगन
झटके भर में ध्वस्त हो गया
अश्रूपूरित युगल नयन।
लेशमात्र भी नहीं थी शंका
खिला-खिला था हर्षित मन
विनाशकारी आंधी बन आई
सुख-शांति पर लगा ग्रहण
जिस मालिन के स्वेद बिंदु से
वर्धमान था वन-उपवन
काल ग्रास में समा गई
छोड़ गई पुरजन-परिजन।
मित्र बंधु कुटुंब सभी का
शोक सांत्वना का चलता क्रम
आशा है अब भी लौटेगी
मृगतृष्णा है या मतिभ्रम
होनी तो होकर रहती है
कर ले कितने यत्न-जतन
जन्म-मृत्यु तो अटल सत्य है
सृष्टि का शाश्वत सरल नियम।।
No comments:
Post a Comment