ईश्वर की संतान हैं हमसब
जड़-चेतन हो या दिव्यांग
एक ही उपवन के खिले फूल
मानव-मानव सब एक समान
सर्वांग-दिव्यांग में भेदभाव
विकृत मानसिकता की पहचान
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग।
बुद्धि में, विवेक में, ज्ञान और विज्ञान में,
संपन्न करें हम उन्हें अवसर-अधिकार में
एकाकीपन का दंश न झेलें
और न सहे अपमान
मिलजुल कर हम उन्हें दिलाएँ
जीवन की मुस्कान
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग।
समाज के अभिन्न अंग
मुख्यधारा के घटक
दया-करूणा के पात्र नहीं
सम्मान के भूखे निःशक्त
शारीरिक संरचना नहीं
गुणों का हम करें बखान
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग।
व्यक्ति का परिवार का
समाज का यही हो लक्ष्य
अवसर-अधिकार से दिव्यांगजन बने सशक्त
अष्टावक्र, सूरदास औ जायसी के कीर्तिमान
भरत भूमि भारत में, करें हम उन्हें सलाम
ईश्वर की अनुपम कृति दिव्यांग ।

सटीक भाव👌🏻
ReplyDeleteToo good sir
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