देतें है जन्म
बनाते हैं योग्य
सहते हैं दुख
सींचते हैं बगिया
बढ़ती है उम्र
झुकती कमर
बूढ़ी होती आँखें
मिलता तिरस्कार
नहीं मिलता है संतति
का सहारा
प्रेम और स्नेह
भेजे जाते वृद्धाश्रम
फिर भी कहलाते श्रवण कुमार
बहुत कष्ट होता है !
कहलाते अभिन्न मित्र
दिखलाते अपनत्व
साथ देने की करते कसमे-वादे
बहाते घड़ियाली आँसू
पर करते विश्वासघात
आती जब विपत्ति
मदद की होती आस
तो खींचते हैं पैर
बनाते बहाने
करते हैं अहित
मुख में अमृत
हृदय में विष
फिर भी कहलाते मित्र
बहुत कष्ट होता है !
बड़े अरमानों से
पालते हैं बेटी
देते हैं सामर्थ्य भर शिक्षा
बनाते हैं योग्य
ढूँढ़ने निकलते जब
कन्या हेतु योग्य वर
बाधक बनता है
दहेजरूपी दानव
करते हैं आदर्शवादी बातें
वर के पिता
दहेज की वेदी पर
देते आदर्शवाद को तिलांजलि
माँगते दान-दहेज
बहुत कष्ट होता है !
जीवनदायिनी गंगा में
फेंकते निर्माल्य
बहाते कचरा
धोते गंदे-मैले कपड़े
करते स्नान ध्यान
दर्शन, मंजन, पान
किनारे पर मनाते पिकनिक
फैलाते प्रदूषण
अविरलता में बनते बाधक
फिर भी करते गंगा आरती
बोलते हैं हर-हर गंगे
करते पूचा-अर्चना
लेते स्वच्छता की शपथ
तब बहुत कष्ट होता है !

वाह!🙏🏻
ReplyDeleteAwesome👌
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