रूप-रंग, जाति-धर्म, वेश-भूषा हैं अनेक,
हर रंग के हैं फूल खिले, उपवन है भारत देश।
विश्व-मानचित्र पर सुशोभित विभिन्न देश,
देशों का देश है, अतुलित है भारत देश।।
नदी-नाले, झरने-झील, वन प्रदेश है सुरम्य,
शस्य-श्यामला धरा, प्रहरी हिमालय अनन्य।
भरत-भूमि भारत है, धन-धान्य है अशेष,
ऋषियों की कर्मभूमि, देवभूमि भारत देश।।
शांति, सत्य, अहिंसा का बाँटता है संदेश,
आन-बान-शान पर मृत्यु का करे अभिषेक।
गाँधी की जन्मभूमि, कर्मभूमि है विशेष,
जाज्वल्यमान नक्षत्र है, आलोकित भारत देश।।
देश की रक्षा हेतु तत्पर है लाखों वीर,
चाहे हो रणभूमि, दुर्गम हो कारगिल।
अखण्ड है, नम्य है, अतुल्य है, एक है,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक है भारत देश।।

बहुत बढ़िया👌🏻
ReplyDeleteSuperb !!!
ReplyDeleteअतुल्य रचना 👌
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