Saturday, May 30, 2020

साक्षरता- सामर्थ्य



साक्षरता का दीप जलाकर,

जन-जन में विश्वास जगाएँ,

निरक्षता को दूर भगाकर,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


गली-गली और गाँव-गाँव में,

सरस्वती का सुर फैलाएँ,

बच्चे-बूढ़े या जवान हों,

सबको कॉपी-कलम थमाएँ,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


जनता का जनतंत्र है भाई,

ग्रामसभा में इसे बताएँ।

अपना शासन खुद करने को,

साक्षरता को राह दिखाएँ

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


साक्षरता अभियान की आँधी,

घर-घर सुरभित करती जाए,

निरक्षरता अभिशाप है भाई,

हमसब मिलकर इसे भगाएँ,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


गाँधीजी की कर्मभूमि में,

ग्राम-स्वराज का अलख जगाएँ,

शिक्षा है अनमोल रतन,

ऐसा हम परचम लहराएँ,

आएँ ! नया बिहार बनाएँ।।


2 comments:

  1. सही सोच, सुंदर भाव🙏🏻

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  2. आपके प्रासंगिक कविता की सार्थकता बनी हुई है सर

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