Tuesday, June 30, 2020

सुपौल परिचय



बिहार राज्य की हृदय स्थली

कंचन हिमजल से सिंचित

भारत-नेपाल की सीमा पर

सुंदर दरवाजा सुपौल है स्थित

उत्तर में नेपाल अवस्थित

दक्षिण में मधेपुरा-सहरसा

अररिया जिला है पूरब में

पश्चिम में मधुबनी बसा।

भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से 

चतुर्थ कल्प होलोसीन में निर्माण

मुंगेर-भागलपुर में पूर्व में शामिल

सुपौल है बिहार की शान

सभ्यता संस्कृति,रहन-सहन

भाषा-बोली संग परिधान

राजनीतिक चेतना,संघर्ष भावना

गागर में सागर का भान।

आम,बरगद,पीपल,नीम

कटहल,महुआ और पलाश

गेंदा,गुलाब,बेली,सूर्यमुखी

प्राकृतिक सौंदर्य में लाये निखार

कहीं-कहीं विद्यमान है अब भी

साल-शीशम,ताड़-खजूर

नीलगाय के भी दर्शन होते

कौआ,गौरैया,हंस,गरूड़।

तिलयुगा,धेमुरा और कोसी

आच्छादित है क्षेत्र सुपौल

धान,मूँग,मक्के की खेती

जूट की खेती भी करते लोग

पशुपालन,मछली पालन संग

मखाना उत्पादन भी संभाव्य

शस्य-श्यामला भूमि जिले की

छह ऋतुओं की है श्रृंगार।

हरदी की वनदुर्गा,गढ़ लोरिक

परसरमा की गोसाईं कुटी

राजेश्वरी की माँग भगवती

कर्णपुर की कृष्णाष्टमी

गनपतगंज का विष्णुधाम

कपिलेश्वर-तिलहेश्वर हैं प्रसिद्ध

वाजितपुर ऐतिहासिक स्थल

पुरातत्त्वविदों की पड़ी दृष्टि।

त्रिवेणीगंज का सिख गुरूद्वारा

गिरिजाघर भी नामचीन

भूतही दरगाह में पूर्ण मनौती

लोगों की लगती है भीड़

कर्णदेव से जुड़ा हुआ है

कर्णपुर प्राचीन ग्राम

नमक आंदोलन का विगूल फूंक

लाल बाबाजी बने महान।


सांस्कृतिक विविधता,अनेकता में एकता

स्वतंत्रता-संग्राम में सपूतों की वीरता

गाँधी-विनोवा का जिला ने किया सम्मान

राजेन्द्र बाबू भी आए करने

पूर्वी बाँध का निर्माण

लोग-बाग शांत हैं,साक्षी है अंशुमान

सांप्रदायिक सौहाद्र का

स्थापित है कीत्तिमान।

साहित्य सृजन की सिद्धभूमि

कवि-मनीषी हुए अनेक

मुख्यरूप से मैथिलीभाषी

नहीं किसी से राग-द्वेष

परंपराएँ,अद्वितीय,अनुपम

मूज,मेखला और मड़वा

मधुश्रावणी में नव-विवाहिता

करती हैं विषहरी की पूजा।


कोशी की कल-कल धारा में,

कोयल की कूक और भौंरे के गूंजन में

मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारा में

हम सबके अरमान प्रबल

प्रगति-पथ पर सतत् अग्रसर

खुशहाली,शांति चहुँओर

जन-मानस की यही कामना

सुख-समृद्धिमय रहे सुपौल।


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