पर्यावरण संरक्षण,संवर्धन
श्रद्धा,विश्वशांति
की चाह
प्रकृति-प्रेम पारंपरिक दृष्टिकोण
वृक्षारोपण है अनिवार्य
यजुर्वेद में शांतिकामना
पृथ्वी,वनस्पति औ' अंतरिक्ष
पर्यावरण संरक्षण हित में
प्रबल सहायक वृक्ष-मित्र।
आम,बांस,पीपल,बरगद
तुलसी,कुश हो या दूर्वा
शुभ अवसर पर होती है
वृक्ष और पौधों की पूजा
औषधीय गुणों से भरे-पड़े
वृक्ष हरण करते दुख-रोग
कल्पतरु दे मनवांछित फल
शोक हरण है वृक्ष अशोक।
वृक्ष सतत् मानव हितकारी
बिना लिए कोई प्रतिदान
जन-जीवन,पर्यावरण संतुलन
वृक्ष सदा अनुपम वरदान
फल-फूल,औषधि,फर्नीचर
पशु-पक्षी का आश्रय-स्थल
जीवन-रेखा है पृथ्वी की
मानव का भविष्य है जंगल।
“चिपको आंदोलन”,“हरित क्रांति”
“पृथ्वी के मित्र”,“संपोषित विकास”
पर्यावरण संरक्षण खातिर
मंथनरत है विश्वसमुदाय
मानव-हित में जीवन अर्पण
वृक्षमित्र है ऋषि दधीचि
जल-जीवन-हरियाली वांछित
वृक्षारोपण है अभीष्ट।।

बेहतरीन🙏🏻
ReplyDeleteप्रकृति की कृपा पर ही जीवन का अस्तित्व है।
ReplyDeleteअच्छी बात कही है कविता द्वारा।
प्रकृति के बारे में ये कविता इस काल मे और भी प्रासंगिक है
ReplyDeleteNice👌👌👌
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