Sunday, June 7, 2020

वृक्षारोपण है अभीष्ट



पर्यावरण संरक्षण,संवर्धन

श्रद्धा,विश्वशांति की चाह

प्रकृति-प्रेम पारंपरिक दृष्टिकोण

वृक्षारोपण है अनिवार्य

यजुर्वेद में शांतिकामना

पृथ्वी,वनस्पति औ' अंतरिक्ष

पर्यावरण संरक्षण हित में

प्रबल सहायक वृक्ष-मित्र।

आम,बांस,पीपल,बरगद

तुलसी,कुश हो या दूर्वा

शुभ अवसर पर होती है

वृक्ष और पौधों की पूजा

औषधीय गुणों से भरे-पड़े

वृक्ष हरण करते दुख-रोग

कल्पतरु दे मनवांछित फल

शोक हरण है वृक्ष अशोक।

वृक्ष सतत् मानव हितकारी

बिना लिए कोई प्रतिदान

जन-जीवन,पर्यावरण संतुलन

वृक्ष सदा अनुपम वरदान

फल-फूल,औषधि,फर्नीचर

पशु-पक्षी का आश्रय-स्थल

जीवन-रेखा है पृथ्वी की

मानव का भविष्य है जंगल।

चिपको आंदोलन”,“हरित क्रांति

पृथ्वी के मित्र”,“संपोषित विकास

पर्यावरण संरक्षण खातिर

मंथनरत है विश्वसमुदाय

मानव-हित में जीवन अर्पण

वृक्षमित्र है ऋषि दधीचि

जल-जीवन-हरियाली वांछित

वृक्षारोपण है अभीष्ट।।


4 comments:

  1. प्रकृति की कृपा पर ही जीवन का अस्तित्व है।
    अच्छी बात कही है कविता द्वारा।

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  2. प्रकृति के बारे में ये कविता इस काल मे और भी प्रासंगिक है

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