मानव जीवन का केन्द्र-बिन्दु
व्यक्तित्व का करता है निर्माण
जीविका का उपकरण मात्र नहीं
सामाजिक जीवन की है पहचान
अविभाज्य अंग है जीवन का
काम में ही हम खोजें आराम।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता का है मार्ग
अस्तित्व को देता अर्थ-आयाम
सामाजिक उन्नति का मूल रहस्य
काम में ही मान-सम्मान
आत्मनिर्भरता का प्रबल प्रतीक
मानव को करता है आनंदित।
आर्थिक आवश्यकताओं की होती पूर्त्ति
नैतिक गुणों की सद्य: अनुभूति
काम में ही मानव की शान
आत्म संतुष्टि दूर करे थकान
समय और ऊर्जा का सामंजन
काम है मूल्यों का आवंटन।
काम है आत्म सम्मान का स्रोत
सहयोग की भावना से ओतप्रोत
समय पालन, अनुशासन आधार
सपनों को कर सकते साकार
काम में जीवन के विविध रंग
काम का हम लें आनंद।।

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