तुम ही संध्या, गायत्री
शक्ति स्वरूपा, महाविद्या तुम
जल-स्थल निवासिनी
ऊर्जा की देवी मातंगी मॉं
मॉं तुम शांति प्रदायिनी।
नीलवर्णा, बाघम्बरा
वीरभूम विराजमान
कमल, कटार धारिणी मॉं
हयग्रीव का किया विनाश
भक्तजन की करें रक्षा
बारंबार तुम्हें प्रणाम।
एकाजाता, उग्रतारा
महोग्रा, कामेश्वरी
चामुण्डा, भद्रकाली मॉं
बज्रा, नीलसरस्वती
अष्टतारा दयामयी मॉं
मॉं भगवती कल्याणमयी।
साकार, निराकार मॉं
प्रकृति की हरीतिमा
महादेवी, पार्वती तुम
जन-जन करे तेरी वंदना
''श्यामल'' शरणागत तेरी माँ
अहर्निश करे तेरी अर्चना ।।

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