आर्थिक विकास, शहरीकरण
औद्योगीकरण हेतु अनिवार्य
जमीन का टुकड़ा मात्र नहीं
भूमि अस्मिता का है पर्याय
जन-जीवन है भू-आधारित
जनमानस है भूमि पुत्र
अनुपम श्रोत शक्ति-ऊर्जा का
भूमि से जुड़ा मानव अस्तित्व।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग है नोडल
भूमि सुधार के नीति श्रोत
अंचल स्तर पर भूमि सुधार हेतु
राजस्व कर्मचारी हैं थामे डोर
राजस्व प्रशासन के अंतर्गत
प्रमंडल, जिला, अनुमंडल, अंचल
प्रशासनिक, भौगोलिक दृष्टिकोण से
दस से बीस हल्कों में विभक्त हैं अंचल।
प्रत्येक कर्मचारी के जिम्मे है
एक या अधिक हल्के का प्रभार
भूमि संबंधी मामलों के संदर्भ में
कर्मचारी पर है दारोमदार
कर्मचारियों के मार्गदर्शन हेतु
वर्ष 1953 का अनुदेश उपलब्ध
‘इन्स्ट्रक्शन्स फ़ॉर द गाइडन्स ऑफ कर्मचारिज’ का
राजस्व कर्मी ले सकते संदर्भ।
लगान वसूली, दाखिल खारिज
जमावंदी पंजी करना अपडेट
लोकभूमि का सर्वे-संरक्षण
मुख्य कार्यों से है अभिप्रेत
कृषि सांख्यिकी, प्राकृतिक आपदा
सैरात बन्दोबस्ती में सहयोग
जनगणना, पशुगणना में भी
कर्मचारी का अहम है रोल।
संप्रति कार्य प्रकृति में परिवर्तन
समय, परिस्थिति के अनुरूप
लोक कल्याणकारी राज्य के परिप्रेक्ष्य में
दायित्व हो गए हैं महत्वपूर्ण
तकनीकी क्रांति हेतु कृत-संकल्पित
राजस्व विभाग सजग-सतर्क
रैयतों की सुविधा-सहायता हेतु
उपलब्ध हैं अनेक विकल्प।
ऑनलाइन दाखिल-खारिज
डिजिटाइज्ड जमाबंदी पंजी निर्माण
जमाबंदी पंजी की त्रुटियों का
‘परिमार्जन’ पोर्टल पर समाधान
ऑनलाइन लगान भुगतान संग
एल.पी.सी का है प्रावधान
शनिवार को थाना पर करना
भू -विवाद का सम्यक समाधान।
कार्यशैली में सुधार हेतु
निगरानी पद्धति में संशोधन
विभाग स्तर से संप्रति विकसित
‘प्वाइंट ऑफ डिले नोटिफ़िकेशन’
अच्छे कार्य करने पर होगा
राजस्व कर्मी का मान-सम्मान
मासिक कार्य मूल्यांकन हेतु
‘पॉप-पर्सेन्टाइल’ का है प्रावधान।
निःसंदेह दायित्व है गुरुतर
महत्वपूर्ण हैं इनके काम
राजस्व कर्मचारी होते हैं
प्रशासन की आँख और कान
ईमानदारी और पारदर्शिता
समयबद्ध कार्य-अभियान
प्राप्त शक्ति का रैयत-हित में
उपयोग करें, पायें सम्मान।।
No comments:
Post a Comment