मातृभाषा है मनुज की
किलकारी की पहली भाषा
पारिवारिक सम्पर्क-संसर्ग में
विकसित जीवन की अभिलाषा
स्थान-समूह-परिवेश की भाषा
अपनापन का देती भान
भावनाओं की समझ सिखाती
मातृभाषा है प्रथम सोपान।
संस्कार-व्यवहार का मूल श्रोत
नैतिक विकास का सहज मार्ग
मातृभाषा के सहज संगम से
मानव व्यक्तित्व के खुले द्वार
मौलिक विचारों की केंद्रबिन्दु
मातृभाषा आत्मा की आवाज़
सीख,समझ,ज्ञान की जननी
जीवन-संगीत की सुरमयी साज।
संस्कार-व्यवहार का आधार
सभ्यता–संस्कृति संग जुड़ाव
मातृभाषा में निहित है
आत्मरक्षा का प्रबल भाव
विकास प्रक्रिया में है साधक
अपूर्व आनंद का देती भान
मातृभाषा का अभिनंदन-वंदन
सदैव दें इसे अधिमान।
बहुभाषाभाषी है भारत
विविधता में एकता का प्रतीक
एक सूत्र में बँधे हैं हमसब
भाषा यद्यपि भिन्न -भिन्न
एकता-अखंडता परम ध्येय है
अलग-अलग भले परिधान
मातृभाषा के मान-सम्मान संग
राष्ट्रभाषा का गौरवगान ।।
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