अभिधा,लक्षणा,व्यंजना
शब्द-शक्ति के रूप
कथित,लक्षित,व्यंजित
शब्द हैं ब्रह्म
स्वरूप
शब्द शक्ति से ही नि:सृत
काव्य में
रस-संचार
संगीत की स्वर-लहरी
में
छिपा शब्द-भंडार ।
शब्दों से ही मिलती है
ताली या आपत्ति
शब्द प्रमाणित औषधि है,
घर लाए सुख-शांति
शब्द-शक्ति से बन जाते है
मनुज के बिगड़े काम
शब्दों पर ही निर्भर हैं
अच्छे-बुरे परिणाम ।
बनते-बिगड़ते,
रिश्ते-नाते
शब्दवाण दुश्मन घर
लाते
शब्द हार है,शब्द
जीत भी
शब्द हँसाते,शब्द
रुलाते
दिल-दिमाग़ से सोचें
बोलें
शब्द अमृत-विष
बरसाते
मधुर शब्दों के
वातायन
वातावरण को स्वच्छ बनाते ।
मृदु बोली है रामवाण,
कर सकते निश्चित हितसाधन
जादुई प्रभाव शब्द का,
वाक् संयम,उचित अनुशासन
शब्द है व्यवहार परिचायक,
शब्द प्रकट करते संस्कार
बोलें प्रिय-मधु शब्द सदा,
सार्थक शब्दों का करे व्यवहार।।
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