Wednesday, June 30, 2021

गाँव की शीतल हवा


एकाक़ीपन का द्वंद्व

उद्वेलित अंतर्मन

थका-थका और व्यथित

अवसादित जनमन

आशा की एक किरण

एक ही विकल्प-आस

मनुज के हर मर्ज़ की

एक ही अचूक दवा

शहर की दवा से अच्छी

गाँव की शीतल हवा ।

            शहर की संस्कृति

            अपार्टमेंट में सिमटी

            दूर के पड़ोसी

            यंत्रवत ज़िन्दगी

            सबकुछ उपलब्ध यहाँ

            अपनत्व के सिवा

            अमृत-सरीखी है

            प्रकृति का अनुपम उपहार

            महौषधि है रामवाण

            गाँव की शीतल हवा ।

द्वेष भी, विद्वेष भी

आडंबर, आलाप भी

गाँव की ज़िन्दगी में

प्रतिस्पर्धा की आँच भी

इंसानियत जीवित फिर भी

सहयोग, सम्मान भी

कष्ट और विपत्ति में

न गिला, न शिकवा

शहर की दवा से अच्छी

गाँव की शीतल हवा ।

            गगनचुंबी अट्टालिकाएँ

            फ़्लाई ओवरों का जाल

            चमकीली सड़कें हैं

            हरित-भरित घिरे पार्क

            खेतों की हरियाली कहाँ

            विस्तृत अमराई नहीं

            गीत गातीं ललनाएँ

            दृष्टिगत जहाँ सदा

            शहर की दवा से अच्छी

            गाँव की शीतल हवा ।।

3 comments:

  1. श्रद्धेय सुन्दर कवित्व शक्ति से मनोदशा एवं ग्रामीण स्तरीय जीवन के सुन्दर सटीक भावना आप के कवि ह्रदय से अभिभूत हूँ

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  2. जीवन यात्रा में गांव और नगर की शैली का तुलनात्मक चित्रण,बहुत मार्मिक किंतु सम्हलने का सात्विक संदेश,आपकी लेखनी को नमन।

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