एकाक़ीपन का द्वंद्व
उद्वेलित अंतर्मन
थका-थका और व्यथित
अवसादित जनमन
आशा की एक किरण
एक ही विकल्प-आस
मनुज के हर मर्ज़ की
एक ही अचूक दवा
शहर की दवा से अच्छी
गाँव की शीतल हवा ।
शहर की संस्कृति
अपार्टमेंट में सिमटी
दूर के पड़ोसी
यंत्रवत ज़िन्दगी
सबकुछ उपलब्ध यहाँ
अपनत्व के सिवा
अमृत-सरीखी है
प्रकृति का अनुपम उपहार
महौषधि है रामवाण
गाँव की शीतल हवा ।
द्वेष भी, विद्वेष भी
आडंबर, आलाप भी
गाँव की ज़िन्दगी में
प्रतिस्पर्धा की आँच भी
इंसानियत जीवित फिर भी
सहयोग, सम्मान भी
कष्ट और विपत्ति में
न गिला, न शिकवा
शहर की दवा से अच्छी
गाँव की शीतल हवा ।
गगनचुंबी अट्टालिकाएँ
फ़्लाई ओवरों का जाल
चमकीली सड़कें हैं
हरित-भरित घिरे पार्क
खेतों की हरियाली कहाँ
विस्तृत अमराई नहीं
गीत गातीं ललनाएँ
दृष्टिगत जहाँ सदा
शहर की दवा से अच्छी
गाँव की शीतल हवा ।।

श्रद्धेय सुन्दर कवित्व शक्ति से मनोदशा एवं ग्रामीण स्तरीय जीवन के सुन्दर सटीक भावना आप के कवि ह्रदय से अभिभूत हूँ
ReplyDeleteNice,soul stirring.
ReplyDeleteजीवन यात्रा में गांव और नगर की शैली का तुलनात्मक चित्रण,बहुत मार्मिक किंतु सम्हलने का सात्विक संदेश,आपकी लेखनी को नमन।
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