वाणी कठोर अवसादित मन
जीवन-शैली में असंयम
स्वजन विरोध, प्रसिद्धि ह्रास
परिवर्तित जीवन अंदाज
निष्क्रिय-शिथिल-प्रमादित मन
चिंतित मानव के हैं लक्षण।
चिंता हर लेती सुख औ शांति
शंकित होता मन भाँति-भाँति
ग्रसित कर लेता विविध रोग
अकारण उठता सतत् क्रोध
चिता से होती चिंता क्रूर
समस्त समस्या की है मूल।
चिंता से तिल-तिल आघात
हृदय-शूल किंचित व्याघात
कुण्ठित हो जाता बुद्धि-विवेक
पग-पग पाता कष्ट-क्लेश
उचित-अनुचित का मिटे ज्ञान
अंकिचन, निरीह होता इंसान।
अहर्निश चिंता नींद हराम
स्वास्थ्य हानि अनमने काम
सामाजिक संबंधों में विच्छेद
चिंता से जागृत कलह-द्वेष
चिंता करता है मनुष्य व्यर्थ
चिंतित मन से होता अनर्थ।
सुख-दुख का जीवन सामंजन
ईश्वर इच्छा का अभिनंदन
सकारात्मक सोच चिंता का अंत
सुखी जीवन का है मूल मंत्र
सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग
पतझड़ है निश्चित है बसंत।
सृजनशीलता का विकास
सम्यक् दिनचर्या योगाभ्यास
इच्छा सीमित संतोषी मन
तनाव मुक्त हर्षित जीवन
मद्य सेवन का तिरस्कार
सफल जीवन का मूलाधार।।