Wednesday, April 13, 2022
मेहनत-किस्मत
Monday, March 7, 2022
स्वर्णिम है विजय वर्ष
स्वर्णिम अवधि अर्धशतक
स्वर्णिम उपलब्धि वर्ष
सेना को प्राप्त स्वर्णपदक
जन-जन में व्याप्त हर्ष
गर्व भी, अभिमान भी
देश की है धड़कन
आन-बान-शान भी
अहर्निश सेवा निरत
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।
लक्ष्य पर टिके नयन
कर्तव्य वहन मृत्यु पर्यन्त
क्यों न हो हमें गर्व ?
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।
शत्रु करे आक्रमण
विजय मात्र ध्येय है
शत्रु का करे दमन
मृत्यु का वरण सहर्ष
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।
कश्मीर की हो बाढ़
उत्तराखंड में फटे बादल
फ़रिश्ता मददगार
हरदिन है कार्यदिवस
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।।
Saturday, February 19, 2022
सीता: जीवन रेखा
कृषि की अधिष्ठात्री देवी
हल से नि:सृत है रेखा
मैथिली, मिथिला की पुत्री
लक्ष्मी रूपा, राम प्रिया
नारी सम्मान की संरक्षक
जनकनंदिनी भूमिसुता ।
सुख-धन-वैभव त्याग कर
वरण राम पद चिह्न
राम-लखन संग वनगमन
सीता शक्तिपूंज
पतिव्रता, नारायणी
सीता-राम अभिन्न ।
माया की सीता हरण
दशानन मन में खोट
तनिक नहीं विचलित हुई
असुर-शक्ति सम खद्योत
अग्नि परीक्षा में सफल
तृण धरि सीता ओठ ।
सीता है संकल्प-शक्ति
सीता है संघर्ष
सीता जननी, अग्रणी
सीता है आदर्श
त्याग, सादगी, शुद्धता
सीता सचमुच नारी दर्प ।
सृजन हार हैं सृष्टि के
नर नारी समरूप
यक्ष प्रश्न है अनुत्तरित
उपेक्षित कबतक नारी शक्ति?
कबतक होगी अग्निपरीक्षा ?
बंधन से कब होगी मुक्त ?
Monday, January 24, 2022
परिंदों की हम कर लें बात
उड़ने की असीम चाह
कलरव से गुंजित धरती
प्रकृति संग हास-परिहास
ईको तंत्र के संरक्षक
परिंदों की हम कर लें बात।
कई प्रजातियाँ खगवृंदों की
हर जगह इनका प्रवास
ऐविस श्रेणी के हैं प्राणी
परिंदों का बृहद संसार
नाना रूप रंग बहुतेरे
परिंदों की हम कर लें बात।
सतत व्यस्त, अनवरत कार्य
तिनके-तिनके की परवाह
मृदुल स्वर, चंचल जीवन
उन्मुक्त ऊर्जा का संचार
पर्यावरण संरक्षक, कृषक मित्र
परिंदों की हम कर लें बात।
संगीतमय करते प्रकृति को
सरलता, सजगता की सौग़ात
रंग-विरंगे पंख सुनहरे
प्रेम-स्नेह की दे सौग़ात
संरक्षण-संवर्धन अपेक्षित, वांछित
परिंदों की हम कर लें बात।।
Wednesday, January 19, 2022
यक़ीनन
स्नेह, प्रेम बेहिसाब
यक़ीनन नहीं रहेगा
बहुत दिनों का साथ।
उपकार, मदद बेहिसाब
अप्रत्याशित विश्वासघात।
यदि किसी को देते हैं
यक़ीनन वापस माँगने पर
संबंधों में निश्चित दरार।
प्रशंसा बेझिझक, बेहिसाब
यक़ीनन समय आने पर
दिखेगा उसकी औक़ात।
धन व्यय बेहिसाब
यक़ीनन संकट में वह
खींच लेगा अपना हाथ।
बिन माँगे बेहिसाब
यक़ीनन ध्रुव सत्य यही
अपना कर्म, अपना साथ।।
Monday, December 27, 2021
सुख-दुख का जीवन सामंजन
वाणी कठोर अवसादित मन
जीवन-शैली में असंयम
स्वजन विरोध, प्रसिद्धि ह्रास
परिवर्तित जीवन अंदाज
निष्क्रिय-शिथिल-प्रमादित मन
चिंतित मानव के हैं लक्षण।
चिंता हर लेती सुख औ शांति
शंकित होता मन भाँति-भाँति
ग्रसित कर लेता विविध रोग
अकारण उठता सतत् क्रोध
चिता से होती चिंता क्रूर
समस्त समस्या की है मूल।
चिंता से तिल-तिल आघात
हृदय-शूल किंचित व्याघात
कुण्ठित हो जाता बुद्धि-विवेक
पग-पग पाता कष्ट-क्लेश
उचित-अनुचित का मिटे ज्ञान
अंकिचन, निरीह होता इंसान।
अहर्निश चिंता नींद हराम
स्वास्थ्य हानि अनमने काम
सामाजिक संबंधों में विच्छेद
चिंता से जागृत कलह-द्वेष
चिंता करता है मनुष्य व्यर्थ
चिंतित मन से होता अनर्थ।
सुख-दुख का जीवन सामंजन
ईश्वर इच्छा का अभिनंदन
सकारात्मक सोच चिंता का अंत
सुखी जीवन का है मूल मंत्र
सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग
पतझड़ है निश्चित है बसंत।
सृजनशीलता का विकास
सम्यक् दिनचर्या योगाभ्यास
इच्छा सीमित संतोषी मन
तनाव मुक्त हर्षित जीवन
मद्य सेवन का तिरस्कार
सफल जीवन का मूलाधार।।
Tuesday, December 21, 2021
नदी की आवाज
सभ्यता-संस्कृति की संवाहक
जीवन-प्रवाह की है प्रतीक
जीवन दायिनी होती नदियाँ
निरंतरता की देती हैं सीख
जलश्रोत मात्र नहीं नदियाँ
नदियाँ मधुर जीवन संगीत।
जलीय जीवों की आश्रय स्थली
जल ऊर्जा की अनुपम श्रोत
कृषि, सिंचाई, मछली पालन
नदी नीर पर निर्भर लोग
विरासत और विकास की जननी
जल आधारित विकास-उद्योग।
गंगा-जमुनी संस्कृति हमारी
नदियों पर हम करते गर्व
आस्था, विश्वास की परिचायक
मनाते हम नदी-उत्सव
नदियों को रखना स्वच्छ-धवल
जल-संरक्षण ही सही विकल्प।
जीवन-रेखा जड़-चेतन की
अस्तित्व है संकट में आज
प्रदूषण मुक्ति हेतु नदियाँ
कल-कल कर देतीं आवाज़
नदी की रक्षा, अपनी रक्षा
अविरल रखें नदी जल धार।।
