Friday, August 12, 2022

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

जीवन गढ़े कुम्हार सदृश 

शिक्षक समाज के शिल्पकार

मानवीय गुणों के उत्प्रेरक

सफल जीवन के सूत्रधार

तम करे दूर, उज्ज्वल प्रकाश

अंतर्निहित क्षमता विकास

शिक्षक जगमग प्रकाश-पुंज

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

             शिक्षक पवित्र त्रिवेणी संगम

             गंगा, यमुना, सरस्वती

             गंगा शाश्वत मूल्य की रक्षक

             यमुना जीवंत वर्तमान नीति

             सरस्वती में समाहित है भविष्य

             शिक्षक जीवन मूल्य प्रतीक

             शिक्षक अभाव में जीवन शून्य

             शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

शिष्य-शिक्षक का अटूट है बंधन

श्रद्धा, विश्वास का प्रतीक

शिक्षक हैं जीवन का दर्पण

कर्तव्य पालन की देते सीख

अनुशासन-पाठ, दायित्व-बोध

शिक्षक सहयोगी मानव मीत

उनकी देन अद्भुत-अमूल्य

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य । 

          शिक्षा का परिदृश्य है बदला

          बदला शिक्षक का दायित्व

          व्यवसायीकरण की आपाधापी में

          बदल गया है जीवन-मूल्य

          नैतिक मूल्यों की संरक्षा

          शिक्षक का गुरुतर दायित्व

          शिक्षा पर निर्भर मानव वजूद

          शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।

शिक्षक सचमुच हैं असाधारण

साधारण कथमपि नहीं शिक्षक

वे तो हैं राष्ट्र निर्माता

निर्भर उनपर सुनहरा कल

मानव भविष्य शिक्षा पर निर्भर

शिक्षक हैं आराध्य-स्तुत्य

शिक्षक की महिमा अनंत-अतुल्य

शिक्षक पूज्य, ईश्वर तुल्य ।।   

Tuesday, August 9, 2022

मौन: जीवन-शक्ति

संकल्प-शक्ति, नियंत्रित वाणी

सद् विचार, शांति का सर्जक

मौन से ऊर्जा प्रवाहित

आत्म-चेतना का संरक्षक  

मानव का मौन अमूल्य निधि

आत्म-तत्व का श्रोत है सार्थक ।

                   मौन से संभव साहित्य-सृजन

                   ध्यान की ऊर्जा, शक्ति का मार्ग

                   व्यर्थ की बातों से रखे दूर

                   मौन का मनुज करे अभ्यास

                   ध्यान योग और मौन महौषधि

                   दूर करे मानसिक विकार ।

शब्द-शक्ति का रोके अपव्यय  

मौन देता अप्रतिम लाभ

स्थितप्रज्ञता में मौन सहायक

सर्वार्थ साधन का सही मार्ग

आंतरिक तप, वाणीपर नियंत्रण

मौन से बदले मन के भाव ।

                    आपाधापी, भाग-दौड़ में

                    मौन से मिलती शांति-सुकुन

                    प्रकृति से वांछित शक्ति ग्रहण

                    मौन है अंतर्मुखी गुण धर्म

                    सांसारिक भटकन का राम बाण

                    ध्यान योग और मौन मंत्र ।

मौन से मिलती जीवन-शक्ति

इसकी शक्ति ना आँके कम

संतप्त हृदय का है पाथेय

आत्मचिंतन का मूल मंत्र

मौन है एक व्रत पवित्र

मन अनुकूल वचन और कर्म ।।

Tuesday, June 7, 2022

हिंसा का नहीं औचित्य-आधार

हिंसा से पीड़ित, उद्वेलित

समस्त विश्व मानव-समुदाय

हिंसा है सार्वभौम विपत्ति

हिंसा है जघन्य अपराध

प्रजातान्त्रिक मूल्यों पर प्रहार

हिंसा उत्प्रेरित ‘सिविल वॉर

कथमपि शक्ति का सार नहीं

हिंसा है दुर्गुण, अभिशाप ।

                        हिंसा है बाधक सदा
                        अवरुद्ध प्रगति का मार्ग
                        पलायन के दर्द संग
                        जीवन पर आघात
                        खंडित सामाजिक ताना-बाना
                        खंडित एकता के सूत्र
                        आर्थिक विकास मे बाधक हिंसा
                        हिंसा से नहीं गरीबी दूर ।
हिंसात्मक साधन ले जाता

गलत साध्य की ओर

साध्य-साधन की पवित्रता ही

गांधी विचार के मूल श्रोत

हिंसा कथमपि है नहीं

शुद्धिकरण का सही पर्याय

हिंसा केंद्रित सत्ता अस्थिर

हिंसा कदापि न हो स्वीकार्य ।

                         हिंसा कभी विकल्प नहीं

                         नहीं हृदय का ‘क्लिंसिंग फोर्स

                         स्वतंत्रता का साधन नहीं

                         अग्रसर विनाश की ओर 

                         सचमुच शक्ति का ह्रास है

                         टकटकी शांति की ओर

                         हिंसा से निःसृत आतंक

                         हिंसा के परिणाम कठोर ।

गांधीगिरी सशक्त माध्यम है

अहिंसा शांति का अग्रदूत

अहिंसात्मक प्रतिबद्धता आवश्यक

एकता के प्रबल सूत्र

अहिंसात्मक मार्ग है सर्वोत्तम

मानवता की है आवाज

अहिंसा बसी है जन-मन में

हिंसा का नहीं औचित्य-आधार ।।   

Wednesday, April 13, 2022

मेहनत-किस्मत


मेहनत-किस्मत का है अटूट
अटल, अकाट्य, प्रबल संबंध
मेहनत से निःसृत जीवन में
इंद्रधनुष-सा अनुपम रंग
मेहनत है जीवन का दर्शन
महिमा इसकी अगम-अनंत
निरंतर मेहनत अपेक्षित, वांछित
मेहनत-किस्मत हरदम संग ।
                    मेहनतकश का श्रम ही संबल
                    लबरेज लबालब आत्मबल
                    मेहनत से भाग्य बदल सकता
                    प्रारब्ध मनुज का ले करवट
                    कभी-कभी परिणाम न मिलता
                    मानव-मन को मन अनुकूल
                    मनन, आत्मचिंतन आवश्यक
                    कर्म में निश्चित कोई भूल ।
मेहनत-किस्मत, किस्मत मेहनत
सुमेल से सुरभित जन-जीवन
श्रम का फल न्यून-अधिक संभव
नियति-चक्र श्रम पर निर्भर
न संशय, न मतिभ्रम
आस्था-विश्वास संग करें कर्म
सकारात्मक सोच रखें हरदम
जीवन सुख-दुख का समंजन ।
                    लक्ष्योन्मुख होकर करें कार्य
                    डर का साहस से प्रतिकार
                    सबका वक्त बदलता है
                    मेहनत से स्वप्न करें साकार
                    निर्णय को कार्य में परिणत कर
                    किस्मत का खोलें स्वयं द्वार
                    आराम के क्षण को करें अल्प
                    मेहनत का कोई नहीं विकल्प ।।  

Monday, March 7, 2022

स्वर्णिम है विजय वर्ष


स्वर्णिम विजय की वर्षगाँठ
स्वर्णिम अवधि अर्धशतक
स्वर्णिम उपलब्धि वर्ष
सेना को प्राप्त स्वर्णपदक
जन-जन में व्याप्त हर्ष
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।
              
            सैन्य शक्ति देश की
            गर्व भी, अभिमान भी
            देश की है धड़कन
            आन-बान-शान भी
            अहर्निश सेवा निरत
            स्वर्णिम है विजय वर्ष ।

‘ख़ुद से पहले देश सेवा’
लक्ष्य पर टिके नयन
‘आकाशे शत्रुन जहि’
कर्तव्य वहन मृत्यु पर्यन्त
क्यों न हो हमें गर्व ?
स्वर्णिम है विजय वर्ष । 

            आतंकी गतिविधि हो
            शत्रु करे आक्रमण
            विजय मात्र ध्येय है
            शत्रु का करे दमन
            मृत्यु का वरण सहर्ष
            स्वर्णिम है विजय वर्ष ।

प्राकृतिक प्रकोप हो
कश्मीर की हो बाढ़
उत्तराखंड में फटे बादल
फ़रिश्ता मददगार
हरदिन है कार्यदिवस
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।।

Saturday, February 19, 2022

सीता: जीवन रेखा


कृषि की अधिष्ठात्री देवी 

हल से नि:सृत है रेखा 

मैथिली, मिथिला की पुत्री

लक्ष्मी रूपा, राम प्रिया 

नारी सम्मान की संरक्षक   

जनकनंदिनी भूमिसुता । 

                            सुख-धन-वैभव त्याग कर 

                            वरण राम पद चिह्न 

                            राम-लखन संग वनगमन 

                            सीता शक्तिपूंज 

                            पतिव्रता, नारायणी 

                            सीता-राम अभिन्न । 

माया की सीता हरण  

दशानन मन में खोट

तनिक नहीं विचलित हुई 

असुर-शक्ति सम खद्योत

अग्नि परीक्षा में सफल 

तृण धरि सीता ओठ । 

                            सीता है संकल्प-शक्ति 

                            सीता है संघर्ष

                            सीता जननी, अग्रणी  

                            सीता है आदर्श

                            त्याग, सादगी, शुद्धता 

                            सीता सचमुच नारी दर्प ।

सृजन हार हैं सृष्टि के

नर नारी समरूप 

यक्ष प्रश्न है अनुत्तरित

उपेक्षित कबतक नारी शक्ति? 

कबतक होगी अग्निपरीक्षा ?

बंधन से कब होगी मुक्त ?

Monday, January 24, 2022

परिंदों की हम कर लें बात


नहीं कोई सीमा-सरहद
उड़ने की असीम चाह
कलरव से गुंजित धरती
प्रकृति संग हास-परिहास
ईको तंत्र के संरक्षक
परिंदों की हम कर लें बात।
                कई प्रजातियाँ खगवृंदों की
                हर जगह इनका प्रवास
                ऐविस श्रेणी के हैं प्राणी
                परिंदों का बृहद संसार
                नाना रूप रंग बहुतेरे
                परिंदों की हम कर लें बात। 
सतत व्यस्त, अनवरत कार्य
तिनके-तिनके की परवाह
मृदुल स्वर, चंचल जीवन
उन्मुक्त ऊर्जा का संचार
पर्यावरण संरक्षक, कृषक मित्र
परिंदों की हम कर लें बात।
                संगीतमय करते प्रकृति को
                सरलता, सजगता की सौग़ात
                रंग-विरंगे पंख सुनहरे  
                प्रेम-स्नेह की दे सौग़ात
                संरक्षण-संवर्धन अपेक्षित, वांछित
                परिंदों की हम कर लें बात।।