Monday, January 24, 2022

परिंदों की हम कर लें बात


नहीं कोई सीमा-सरहद
उड़ने की असीम चाह
कलरव से गुंजित धरती
प्रकृति संग हास-परिहास
ईको तंत्र के संरक्षक
परिंदों की हम कर लें बात।
                कई प्रजातियाँ खगवृंदों की
                हर जगह इनका प्रवास
                ऐविस श्रेणी के हैं प्राणी
                परिंदों का बृहद संसार
                नाना रूप रंग बहुतेरे
                परिंदों की हम कर लें बात। 
सतत व्यस्त, अनवरत कार्य
तिनके-तिनके की परवाह
मृदुल स्वर, चंचल जीवन
उन्मुक्त ऊर्जा का संचार
पर्यावरण संरक्षक, कृषक मित्र
परिंदों की हम कर लें बात।
                संगीतमय करते प्रकृति को
                सरलता, सजगता की सौग़ात
                रंग-विरंगे पंख सुनहरे  
                प्रेम-स्नेह की दे सौग़ात
                संरक्षण-संवर्धन अपेक्षित, वांछित
                परिंदों की हम कर लें बात।।

Wednesday, January 19, 2022

यक़ीनन

   यदि किसी से करते हैं
स्नेह, प्रेम बेहिसाब
यक़ीनन नहीं रहेगा
बहुत दिनों का साथ।
                                                 
 यदि किसी का करते हैं
उपकार, मदद बेहिसाब
यक़ीनन होगा आपसे
    अप्रत्याशित विश्वासघात। 

यदि किसी को देते हैं
ऋण-उधार बेहिसाब
यक़ीनन वापस माँगने पर
संबंधों में निश्चित दरार।

यदि करता है कोई
प्रशंसा बेझिझक, बेहिसाब
यक़ीनन समय आने पर
दिखेगा उसकी औक़ात।
 
यदि किसी पर करते हैं
धन व्यय बेहिसाब
यक़ीनन संकट में वह
खींच लेगा अपना हाथ।
 
सुझाव देते हैं हम
बिन माँगे बेहिसाब
यक़ीनन ध्रुव सत्य यही
अपना कर्म, अपना साथ।।

Monday, December 27, 2021

सुख-दुख का जीवन सामंजन


 

वाणी कठोर अवसादित मन 

जीवन-शैली में असंयम 

स्वजन विरोध, प्रसिद्धि ह्रास 

परिवर्तित जीवन अंदाज 

निष्क्रिय-शिथिल-प्रमादित मन 

चिंतित मानव के हैं लक्षण। 

                       चिंता हर लेती सुख औ शांति 

                       शंकित होता मन भाँति-भाँति

                      ग्रसित कर लेता विविध रोग 

                     अकारण उठता सतत् क्रोध 

                     चिता से होती चिंता क्रूर

                    समस्त समस्या की है मूल। 

चिंता से तिल-तिल आघात

हृदय-शूल किंचित व्याघात

कुण्ठित हो जाता बुद्धि-विवेक

पग-पग पाता कष्ट-क्लेश 

उचित-अनुचित का मिटे ज्ञान

अंकिचन, निरीह होता इंसान।

                    अहर्निश चिंता नींद हराम

                    स्वास्थ्य हानि अनमने काम

                    सामाजिक संबंधों में विच्छेद

                    चिंता से जागृत कलह-द्वेष 

                    चिंता करता है मनुष्य व्यर्थ

                    चिंतित मन से होता अनर्थ।

सुख-दुख का जीवन सामंजन

ईश्वर इच्छा का अभिनंदन

सकारात्मक सोच चिंता का अंत

सुखी जीवन का है मूल मंत्र

सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग

पतझड़ है निश्चित है बसंत।

                    सृजनशीलता का विकास 

                    सम्यक् दिनचर्या योगाभ्यास

                    इच्छा सीमित संतोषी मन

                    तनाव मुक्त हर्षित जीवन 

                    मद्य सेवन का तिरस्कार 

                    सफल जीवन का मूलाधार।। 

Tuesday, December 21, 2021

नदी की आवाज

 


सभ्यता
-संस्कृति की संवाहक

जीवन-प्रवाह की है प्रतीक

जीवन दायिनी होती नदियाँ

निरंतरता की देती हैं सीख

जलश्रोत मात्र नहीं नदियाँ

नदियाँ मधुर जीवन संगीत।

          जलीय जीवों की आश्रय स्थली

          जल ऊर्जा की अनुपम श्रोत

          कृषि, सिंचाई, मछली पालन

          नदी नीर पर निर्भर लोग

          विरासत और विकास की जननी

          जल आधारित विकास-उद्योग।

गंगा-जमुनी संस्कृति हमारी

नदियों पर हम करते गर्व

आस्था, विश्वास की परिचायक

मनाते हम नदी-उत्सव

नदियों को रखना स्वच्छ-धवल

जल-संरक्षण ही सही विकल्प।

        जीवन-रेखा जड़-चेतन की

        अस्तित्व है संकट में आज

        प्रदूषण मुक्ति हेतु नदियाँ

        कल-कल कर देतीं आवाज़

        नदी की रक्षा, अपनी रक्षा

        अविरल रखें नदी जल धार।।

Friday, December 3, 2021

समय की सत्ता

समय की होती अपनी सत्ता 
होती इसकी अपनी चाल  
इसकी धारा कभी न रुकती
आगे होते इसके बाल
समय पर होते ऋतु-परिवर्तन 
समय की लीला अपरंपार 
समय के साथ चलना श्रेयस्कर
समय अनुकूल उचित व्यवहार ।
               समय बड़ा अनमोल रत्न है
               करें नहीं समय बर्बाद 
               बेहतर उपयोग अपेक्षित-वांछित
               समय-चक्र चालित संसार 
               समयबद्ध हो जीवन-चर्या
               समय पर काम, पूर्ण प्रयास 
               समय की क़द्र मूलमंत्र है
               फल की प्राप्ति कर्म अनुसार ।
समय के सदुपयोग से मिलती
जीवन में शांति-समृद्धि
समय जोड़े संबंधों के पुल 
समय सुधा अमूल्य निधि 
समय को बदलें अवसर में 
निश्चित होगी कार्य-सिद्धि 
समय को पकड़ें सही समय पर
समय पालन से ही श्री वृद्धि ।
                 टाल-मटोल की नीति है घातक
                 समय पर काम, सार्थक सोच 
                 समय पालन जीवन-दर्शन है 
                 समय का करें सम्यक् उपयोग 
                 कार्य सम्पन्न करना है तत्क्षण
                 कल पर नहीं छोड़ना काम 
                 समय-प्रबंधन उन्नति कारक
                 समय पालन पर केंद्रित ध्यान ।।

Thursday, November 11, 2021

छठ महिमा


आस्था का है पावन पर्व 
प्रकृति पूजा का परिचायक
मनोकामना सिद्धि, फलदायक 
छठी मैया सुख-शांति प्रदायक
सामाजिक सद्भाव, प्रेम संग 
परंपरा से जुड़ते लोग 
सूर्य उपासना, अर्घ्य अर्पण
छठ पर्व मनाते लोग ।
            ईख, अदरक, हल्दी, सुथनी
            सूप-सुपती, बर्तन-दऊरा
            पोखर-तालाब, नदी कछार पर 
            लोगबाग करते हैं पूजा 
            प्रकृति प्रदत्त, मानव निर्मित 
            नारियल, केला, ठेकुआ, खाजा
            अस्त-उदीयमान की पूजा
            समतामूलक पर्व न दूजा ।
दूर-दूर से परिजन-पुरजन
मिलते हैं छठ के अवसर पर 
छठी मैया की पूजा करते
छोटे-बड़े, बन्धु-बाँधव
साफ़-सफ़ाई, स्वच्छता, सुंदरता 
घाट-बाट करते जगमग 
पर्यावरण रक्षण, संरक्षण 
मानव कल्याण करें भरसक ।।

Friday, October 29, 2021

आँसू होते मन के मीत



ख़ुशी के आँसू, गम के आँसू 

गहन पीड़ा, संताप के आँसू 

छू जाय जब मन के तार

आँसू बनते मन के द्वार 

आँसू जैसे सीप में मोती 

स्नेह-प्रेम की सही कसौटी l

                दिल पर जब लगती है चोट 

                दु:स्सह दुःख पीड़ा का बोझ 

                हर्ष का मन में जब अतिरेक 

                रुकते नहीं आँसू के वेग 

                मन हल्का कम करते शोक 

                आँसू सचमुच हैं अनमोल l

आँखों की नमी के रक्षक 

आँसू वे कहलाते बेसल 

नयन साफ़, स्वच्छ परिवेश 

आँसू होते वे रिफ्लैक्स लेक्श

नेत्रनीर भर आते लोचन

भावुक मन, परिपूर्ण इमोशन l

                आँसू होते मन के मित्र 

                तन-मन निर्मल और पवित्र 

                जीवन को रखते जीवंत  

                इनकी शक्ति असीम-अनंत 

                संवेदना, शिल्प के खोले द्वार 

                जीवनसाथी हैं अश्रुधार।।