Wednesday, April 13, 2022

मेहनत-किस्मत


मेहनत-किस्मत का है अटूट
अटल, अकाट्य, प्रबल संबंध
मेहनत से निःसृत जीवन में
इंद्रधनुष-सा अनुपम रंग
मेहनत है जीवन का दर्शन
महिमा इसकी अगम-अनंत
निरंतर मेहनत अपेक्षित, वांछित
मेहनत-किस्मत हरदम संग ।
                    मेहनतकश का श्रम ही संबल
                    लबरेज लबालब आत्मबल
                    मेहनत से भाग्य बदल सकता
                    प्रारब्ध मनुज का ले करवट
                    कभी-कभी परिणाम न मिलता
                    मानव-मन को मन अनुकूल
                    मनन, आत्मचिंतन आवश्यक
                    कर्म में निश्चित कोई भूल ।
मेहनत-किस्मत, किस्मत मेहनत
सुमेल से सुरभित जन-जीवन
श्रम का फल न्यून-अधिक संभव
नियति-चक्र श्रम पर निर्भर
न संशय, न मतिभ्रम
आस्था-विश्वास संग करें कर्म
सकारात्मक सोच रखें हरदम
जीवन सुख-दुख का समंजन ।
                    लक्ष्योन्मुख होकर करें कार्य
                    डर का साहस से प्रतिकार
                    सबका वक्त बदलता है
                    मेहनत से स्वप्न करें साकार
                    निर्णय को कार्य में परिणत कर
                    किस्मत का खोलें स्वयं द्वार
                    आराम के क्षण को करें अल्प
                    मेहनत का कोई नहीं विकल्प ।।  

Monday, March 7, 2022

स्वर्णिम है विजय वर्ष


स्वर्णिम विजय की वर्षगाँठ
स्वर्णिम अवधि अर्धशतक
स्वर्णिम उपलब्धि वर्ष
सेना को प्राप्त स्वर्णपदक
जन-जन में व्याप्त हर्ष
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।
              
            सैन्य शक्ति देश की
            गर्व भी, अभिमान भी
            देश की है धड़कन
            आन-बान-शान भी
            अहर्निश सेवा निरत
            स्वर्णिम है विजय वर्ष ।

‘ख़ुद से पहले देश सेवा’
लक्ष्य पर टिके नयन
‘आकाशे शत्रुन जहि’
कर्तव्य वहन मृत्यु पर्यन्त
क्यों न हो हमें गर्व ?
स्वर्णिम है विजय वर्ष । 

            आतंकी गतिविधि हो
            शत्रु करे आक्रमण
            विजय मात्र ध्येय है
            शत्रु का करे दमन
            मृत्यु का वरण सहर्ष
            स्वर्णिम है विजय वर्ष ।

प्राकृतिक प्रकोप हो
कश्मीर की हो बाढ़
उत्तराखंड में फटे बादल
फ़रिश्ता मददगार
हरदिन है कार्यदिवस
स्वर्णिम है विजय वर्ष ।।

Saturday, February 19, 2022

सीता: जीवन रेखा


कृषि की अधिष्ठात्री देवी 

हल से नि:सृत है रेखा 

मैथिली, मिथिला की पुत्री

लक्ष्मी रूपा, राम प्रिया 

नारी सम्मान की संरक्षक   

जनकनंदिनी भूमिसुता । 

                            सुख-धन-वैभव त्याग कर 

                            वरण राम पद चिह्न 

                            राम-लखन संग वनगमन 

                            सीता शक्तिपूंज 

                            पतिव्रता, नारायणी 

                            सीता-राम अभिन्न । 

माया की सीता हरण  

दशानन मन में खोट

तनिक नहीं विचलित हुई 

असुर-शक्ति सम खद्योत

अग्नि परीक्षा में सफल 

तृण धरि सीता ओठ । 

                            सीता है संकल्प-शक्ति 

                            सीता है संघर्ष

                            सीता जननी, अग्रणी  

                            सीता है आदर्श

                            त्याग, सादगी, शुद्धता 

                            सीता सचमुच नारी दर्प ।

सृजन हार हैं सृष्टि के

नर नारी समरूप 

यक्ष प्रश्न है अनुत्तरित

उपेक्षित कबतक नारी शक्ति? 

कबतक होगी अग्निपरीक्षा ?

बंधन से कब होगी मुक्त ?

Monday, January 24, 2022

परिंदों की हम कर लें बात


नहीं कोई सीमा-सरहद
उड़ने की असीम चाह
कलरव से गुंजित धरती
प्रकृति संग हास-परिहास
ईको तंत्र के संरक्षक
परिंदों की हम कर लें बात।
                कई प्रजातियाँ खगवृंदों की
                हर जगह इनका प्रवास
                ऐविस श्रेणी के हैं प्राणी
                परिंदों का बृहद संसार
                नाना रूप रंग बहुतेरे
                परिंदों की हम कर लें बात। 
सतत व्यस्त, अनवरत कार्य
तिनके-तिनके की परवाह
मृदुल स्वर, चंचल जीवन
उन्मुक्त ऊर्जा का संचार
पर्यावरण संरक्षक, कृषक मित्र
परिंदों की हम कर लें बात।
                संगीतमय करते प्रकृति को
                सरलता, सजगता की सौग़ात
                रंग-विरंगे पंख सुनहरे  
                प्रेम-स्नेह की दे सौग़ात
                संरक्षण-संवर्धन अपेक्षित, वांछित
                परिंदों की हम कर लें बात।।

Wednesday, January 19, 2022

यक़ीनन

   यदि किसी से करते हैं
स्नेह, प्रेम बेहिसाब
यक़ीनन नहीं रहेगा
बहुत दिनों का साथ।
                                                 
 यदि किसी का करते हैं
उपकार, मदद बेहिसाब
यक़ीनन होगा आपसे
    अप्रत्याशित विश्वासघात। 

यदि किसी को देते हैं
ऋण-उधार बेहिसाब
यक़ीनन वापस माँगने पर
संबंधों में निश्चित दरार।

यदि करता है कोई
प्रशंसा बेझिझक, बेहिसाब
यक़ीनन समय आने पर
दिखेगा उसकी औक़ात।
 
यदि किसी पर करते हैं
धन व्यय बेहिसाब
यक़ीनन संकट में वह
खींच लेगा अपना हाथ।
 
सुझाव देते हैं हम
बिन माँगे बेहिसाब
यक़ीनन ध्रुव सत्य यही
अपना कर्म, अपना साथ।।

Monday, December 27, 2021

सुख-दुख का जीवन सामंजन


 

वाणी कठोर अवसादित मन 

जीवन-शैली में असंयम 

स्वजन विरोध, प्रसिद्धि ह्रास 

परिवर्तित जीवन अंदाज 

निष्क्रिय-शिथिल-प्रमादित मन 

चिंतित मानव के हैं लक्षण। 

                       चिंता हर लेती सुख औ शांति 

                       शंकित होता मन भाँति-भाँति

                      ग्रसित कर लेता विविध रोग 

                     अकारण उठता सतत् क्रोध 

                     चिता से होती चिंता क्रूर

                    समस्त समस्या की है मूल। 

चिंता से तिल-तिल आघात

हृदय-शूल किंचित व्याघात

कुण्ठित हो जाता बुद्धि-विवेक

पग-पग पाता कष्ट-क्लेश 

उचित-अनुचित का मिटे ज्ञान

अंकिचन, निरीह होता इंसान।

                    अहर्निश चिंता नींद हराम

                    स्वास्थ्य हानि अनमने काम

                    सामाजिक संबंधों में विच्छेद

                    चिंता से जागृत कलह-द्वेष 

                    चिंता करता है मनुष्य व्यर्थ

                    चिंतित मन से होता अनर्थ।

सुख-दुख का जीवन सामंजन

ईश्वर इच्छा का अभिनंदन

सकारात्मक सोच चिंता का अंत

सुखी जीवन का है मूल मंत्र

सुख-दुख जीवन के अभिन्न अंग

पतझड़ है निश्चित है बसंत।

                    सृजनशीलता का विकास 

                    सम्यक् दिनचर्या योगाभ्यास

                    इच्छा सीमित संतोषी मन

                    तनाव मुक्त हर्षित जीवन 

                    मद्य सेवन का तिरस्कार 

                    सफल जीवन का मूलाधार।। 

Tuesday, December 21, 2021

नदी की आवाज

 


सभ्यता
-संस्कृति की संवाहक

जीवन-प्रवाह की है प्रतीक

जीवन दायिनी होती नदियाँ

निरंतरता की देती हैं सीख

जलश्रोत मात्र नहीं नदियाँ

नदियाँ मधुर जीवन संगीत।

          जलीय जीवों की आश्रय स्थली

          जल ऊर्जा की अनुपम श्रोत

          कृषि, सिंचाई, मछली पालन

          नदी नीर पर निर्भर लोग

          विरासत और विकास की जननी

          जल आधारित विकास-उद्योग।

गंगा-जमुनी संस्कृति हमारी

नदियों पर हम करते गर्व

आस्था, विश्वास की परिचायक

मनाते हम नदी-उत्सव

नदियों को रखना स्वच्छ-धवल

जल-संरक्षण ही सही विकल्प।

        जीवन-रेखा जड़-चेतन की

        अस्तित्व है संकट में आज

        प्रदूषण मुक्ति हेतु नदियाँ

        कल-कल कर देतीं आवाज़

        नदी की रक्षा, अपनी रक्षा

        अविरल रखें नदी जल धार।।