ममता की सूरत होती
ईश्वर की सूरत होती
औलाद की दौलत होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।
रत्नगर्भा जननी होती
कन्हैया की यसुमति होती
राम की कौशल्या होती
देवों की अनुसूया होती
जीजाबाई, बा और टेरेसा होती
भोली-भाली गैया होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।
दुआओं की झोली होती
नौनिहालों की लोरी होती
सबकी मुँहबोली होती
बरगद की छाया होती
अम्मा, बीजी और अंबा होती
जननी जगदम्बा होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।
त्याग की नसीहत होती
पूजा-इबादत होती
कुदरत का करिश्मा होती
अजर-अमर नगमा होती
सरस्वती, गौरी, पद्मा होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।।

Very nice poem.
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर कृति, काबिले तारीफ और मनभावन रचना 👍👍 माँ तो बस माँ होती है, माँ के त्याग और बलिदान की बात ही कुछ और है ।।
ReplyDeleteBeautiful poem.
ReplyDeleteBeautiful description of mother-epitome of unconditional love and sacrifice..what a lovely poem!
ReplyDeleteBeautifully composed.. worth reading!!!
ReplyDeleteVery nice poem
ReplyDeleteसुन्दर कविता
ReplyDeleteसुन्दर रचना
ReplyDelete🙏 मार्मिक रचना 🙏
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