Wednesday, May 6, 2020

माँ कभी बूढ़ी नहीं होती




ममता की सूरत होती
ईश्वर की सूरत होती
औलाद की दौलत होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।

रत्नगर्भा जननी होती
कन्हैया की यसुमति होती
राम की कौशल्या होती
देवों की अनुसूया होती
जीजाबाई, बा और टेरेसा होती
भोली-भाली गैया होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।

दुआओं की झोली होती
नौनिहालों की लोरी होती
सबकी मुँहबोली होती
बरगद की छाया होती
अम्मा, बीजी और अंबा होती
जननी जगदम्बा होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।

त्याग की नसीहत होती
पूजा-इबादत होती
कुदरत का करिश्मा होती
अजर-अमर नगमा होती
सरस्वती, गौरी, पद्मा होती
माँ तो माँ होती है
कभी बूढ़ी नहीं होती।।


9 comments:

  1. बहुत ही सुंदर कृति, काबिले तारीफ और मनभावन रचना 👍👍 माँ तो बस माँ होती है, माँ के त्याग और बलिदान की बात ही कुछ और है ।।

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  2. Beautiful description of mother-epitome of unconditional love and sacrifice..what a lovely poem!

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  3. Beautifully composed.. worth reading!!!

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  4. 🙏 मार्मिक रचना 🙏

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