दोषपूर्ण या अनुचित सेवा
अवरोधक व्यापारिक व्यवहार
मानकों की करे उपेक्षा
गुणवत्ता का घोर अभाव
जीवन और सुरक्षा के लिए
परिसंकटमय होना संभाव्य
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
प्रदत्त करता है समुचित न्याय।
सामग्री खरीद, सेवा की प्राप्ति
नकली या घटिया आपूर्ति
उपभोक्ता हितों की रक्षा
सुनिश्चित करती जिलापीठ
बैंक, बीमा, परिवहन, प्रसंस्करण
विद्युत आमोद-प्रमोद या समाचार
आते है सेवा अंतर्गत
वाणिज्यिक प्रयोजन है अपवाद।
व्यक्ति, फर्म, सोसाइटी
या अविभक्त हिन्दु परिवार
जिलापीठ है उचित फोरम
दायर करें विधिवत परिवाद
सुनवाई, गवाही है अनिवार्य
अनुतोष मिले और मिले न्याय
दोषपूर्ण सेवा हेतु भी
उपबंधित है उचित शास्ति।
आदेश से यदि व्यथित
राज्य आयोग में करें अपील
संरक्षण का उच्च विकल्प
राष्ट्रीय आयोग है शीर्षस्थ
सूचना, शिक्षा और संचार
उपभोक्ता संरक्षण के आधार
उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी
सजग समाज की जिम्मेवारी।।

लोगो की है अभी ख्वाहिश, उपभोक्ता कानून में सुधार की गुंजाइश, प्रक्रिया से मिले मुक्ति, पारदर्शिता और त्वरित न्याय ही इसकी शक्ति
ReplyDeleteWell written 👌👌
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