Friday, June 5, 2020

होली आई, खुशियाँ लाई



जन-जीवन में नव उमंग वो
इन्द्रधनुष-सी छटा बिखेरी
रंग-बिरंगे फूल-फसल पर
प्रकृति भी मानो इतराई
रंगो से आह्लादित होकर
कोयल ने भी कूक मिलाई
होली अनुपम और निराली
होली आई, खुशियाँ लाई।

क्या बच्चे और क्या जवान
सबने खोली है पिचकारी
वसंत के मादक मौसम में
बूढ़ों में पैठी तरूणाई
रंग-भंग में सराबोर हो
सबने उधम खूब मचाई
फागुन, फगुआ, फगुआहट ने
जीवन में लाई अरूणाई
होली आई, खुशियाँ लाई।

होली का शाश्वत संदेश यह
प्रेम, स्नेह का रंग उड़ेलें
हम सब मिलकर भाई-भाई
स्नेह-सिक्त पिचकारी खोलें
जाति-धर्म का भेद मिटाकर
राग-द्वेष की करें विदाई
है हम सबकी दिली तमन्ना
जन-जन की हम करें भलाई
होली आई, खुशियाँ लाई।

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर रचना । शुभकामना संगहि बधाई ।

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