अर्थ-व्यवस्था के स्तम्भ, रीढ़
उपलब्ध कराते अन्न-कण
मिहनत, त्याग-तपस्या से
खाद्यान्न में देश है सम्पन्न
अन्नदाता ऋषि दधीचि है
कृषक माटी के सपूत
देश के नायक कृषक हैं
हरित क्रांति के अग्रदूत ।
जमीन का टुकड़ा नहीं मात्र
कृषक का जीवन है खेत
स्वेद-बिन्दु के सिंचन का फल
लहलहाती फसल, हरित परिवेश
खेतों में ऊपजाकर सोना
आत्मनिर्भर और समृद्ध देश
वंदनीय, पूजनीय कृषक हैं
करें हम उनका अभिषेक ।
कृषक के कल्याण पर निर्भर
देश का समग्र कल्याण
प्रकृति के सहचर-संरक्षक
खेतों में बसते उनके प्राण
अहर्निश करते अथक परिश्रम
सम्मान के हकदार किसान
विकास और समृद्धि के जनक हैं
देश की है जान-शान ।
प्रकृति से संधर्ष निरंतर
आपदा की सहते मार
मानसून पर खेती निर्भर
कभी बाढ़ और कभी सुखाड़
कर्ज में है डूब जाते
टूट जाती है कमर
कर्मवीर, योगी कृषक हैं
प्रारब्ध से नहीं है डर ।
कृषि प्रधान देश भारत में
उपेक्षित रहे न भूमिपुत्र
कृषक की समृद्धि, देश की समृद्धि
मिले उचित समर्थन मूल्य
आधुनिक तकनीक आधारित
मिले डिजीटल कृषि मंच
उच्च जीवन स्तर से ही
कृषक के जीवन में आनंद ।।

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