Sunday, November 8, 2020

खेल: शिक्षा और जीवन

   

 


खेल से निखरता अंग-प्रत्‍यंग

खेल सिखाता धैर्य-संयम

शारीरिक व्‍यायाम, दिमागी विकास

मानसिक विकास का है पर्याय

खेल से मिलती है नव स्‍फूर्ति

तनाव, चिंता से शीघ्र मुक्ति।

शिक्षा का अभिन्‍न अंग खेल

शारीरिक शिक्षा का सुमेल

खेल की घंटी है अपरिहार्य

अनुशासन, नेतृत्‍व क्षमता विकास

चारित्रिक विकास का है माध्‍यम

खेल-कूद जुड़ा अध्‍ययन संग। 

खेल से प्रफ्फुलित मन-मस्तिष्‍क

प्रतिरोधक क्षमता में होती वृद्धि

जीत से नव-उत्‍साह सृजन

हार से अनुभव, ज्ञानार्जन

मान-सम्‍मान, धन की प्राप्ति

राष्‍ट्रीय खेल या ओलम्पिक। 

राष्‍ट्रीय एकता का प्रतीक

खेल भावना है अप्रतिम

हारे-जीते कोई पक्ष

खेल भावना ही विकल्‍प

तनाव मुक्‍त हो खेलें खेल

'टीमवर्क' का शाश्‍वत संदेश।

जीवन भी एक खेल समान

हँसते-खेलने है जीना

ईश्‍वर ने की खेल-खेल में

पृथ्‍वी लोक की रचना

मानव-मात्र खिलाड़ी है

कर्तव्यपालन की लें प्रेरणा।


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