Tuesday, April 4, 2023

आकर्ष-आकर्षक

घर-आँगन की रौनक है

करता हरदम सैर-सपाटा

नंद के लाल सदृश लीला

कभी ज्वार और कभी भाटा

सबका प्यारा,राज-दुलारा

आकर्ष अद्भुत और निराला ।

                        भय नहीं डांट-डपट का किंचित

                        आन-बान का नहीं पता

                        हरपल-हर क्षण चंचल-सा मन

                        मधुर हास मन आनंद दाता

                        हर्षित-पुलकित पुरजन-परिजन

                        आकर्ष की अनुपम बाल अदा ।

निर्मल-निश्छल है मुखमण्डल

काले बाल सम काली घटा

धमा-चौकड़ी इधर-उधर

अस्तव्यस्त घर रहे सदा

माँ के आँचल मे छुप जाए

हमने तो कुछ नहीं किया ।

                        बाल अदा से वारी-न्यारी

                        माँ-दादी का दुख दर्द मिटा

                        तनाव भंजक आकर्ष-आकर्षक

                        नाना बिसरे व्याधि-व्यथा

                        आनंदित हैं दादा शशि-सम

                        निरखि बाल कृष्ण लीला ।

आकांक्षा-तुषार के जिगर का टुकड़ा

आकर्ष पर बरसे आशीष सदा

आशीर्वाद का है आकांक्षी

सब दें इसे आशीष–दुआ

सबके आँगन गूँजे किलकारी

ईश्वर की सबपर सदा कृपा ।।

3 comments:

  1. The Rhythm of your Lines and Spaces is great 🤌❤️ #AwesomeNanu

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