श्रम ही शक्ति, श्रम ही पूजा
इसका कोई विकल्प न दूज़ा
श्रम शक्ति
दुनिया को प्यारी
कभी जाए न मेहनत ख़ाली
पत्थर काट बनती है राह
दशरथ माँझी बने सरताज ।
श्रम से ही सपने साकार
सफल जीवन का आधार
चींटी चलती कोशों दूर
आलस्य उसे नहीं मंजूर
श्रम शक्ति अनुपम, अनमोल
श्रम से बदले भाग्य योग ।
श्रम से कृषक उगाते अन्न
देश बने सक्षम-संपन्न
श्रम ही साधन, श्रम
ही ध्येय
जीवन पथ का है पाथेय
श्रम से ज्ञान, श्रम से विज्ञान
श्रम से पूर्ण आस-अरमान ।
श्रम से जी चुराना पाप
बिना श्रम जीवन अभिशाप
श्रम से सुलझे बिगड़े काम
श्रम ही संज्ञा और सर्वनाम
वेद-पुराण का अंतर्निहित मंत्र
श्रम ही जीवन का मूलमंत्र ।।




