Saturday, September 4, 2021

परख

परखनी हो जब भी औक़ात 
अपने कष्ट की कर लें बात
अपनत्व का अलापते जो राग 
कष्ट में झटक देते हैं हाथ
पल में बदल जाता परिवेश 
दिल में पहुँचाते हैं ठेस 
बदल जाती है उनकी राह
अलग हो जाता है संसार।
                        वक़्त जब नहीं देता है साथ
                        तब आता कष्ट अपार
                        हृदय पर पड़ता है आघात
                        टूटता दुःख का बज्र पहाड़
                       अपने बन जाते बेग़ाने
                       चेहरे बन जाते अनजाने
                       बदलते पल-पल अपना रंग
                       गिरगिट को भी आती शर्म।
नियति करती है जब चोट 
अनचाही घटना घटती रोज़
टूट जाते हैं दिल के तार
अवसादित्त मन में झंझावत
धैर्य धारण ही एक उपाय 
कर्म-संयम ही मात्र पर्याय 
सब्र का मीठा होता फल 
दुःख रहता नहीं हर वक़्त।
                          कुछ अब भी अच्छे लोग
                          कष्ट में करते जो सहयोग
                          छोड़कर अपना काम तमाम
                         आते हैं औरों के काम
                          नियति का चलता रहता चक्र
                          जीवन निश्चित एक संघर्ष
                          हर शाम का नया विहान
                         जीवन है जीने का नाम।।

Tuesday, August 17, 2021

पालक-बालक

बच्चे होते हैं जिज्ञासु

करें जिज्ञासा उसकी शांत

प्रश्नोत्तर से ही मिटेगी

उसकेकच्चे मन की भ्रांति

जिज्ञासा ही है बच्चों की

ज्ञानवृद्धि का उत्तम माध्यम

परिवार ही प्रथम पाठशाला

बच्चे का होता है दर्पण ।

                तुलना करें न अन्य बच्चों से

                कुंठित होगी उसकी इच्छा

                प्रिय वाणी से बढ़े मनोबल

                प्रगति करेगा निश्चित बच्चा

                खेलें-कूदें समय दें उसको

                प्रतिदिन घंटे-दो-घंटे

                मित्रवत व्यवहार करें उससे

                बच्चे होते मन के सच्चे ।

अपनी इच्छा न लादें कथमपि

कभी नहीं दें अनुचित प्रेशर

मनोनुकूल क्षेत्र ही चुनना

भविष्य के लिए होगा श्रेयस्कर

प्रेरित करें, सहयोग करें

सम्मान करें उसकी इच्छा का

अपनी मर्ज़ी के क्षेत्र में अग्रसर

फहराएगा वह विजय-पताका ।

                पारिवारिक वातावरण का निश्चित

                बच्चे पर पड़ता है असर

                माता-पिता का प्यार-दुलार

                बच्चों का होता पथ-दर्शक

                अच्छी शिक्षा दें बच्चों को

                सही मार्ग पर पालक-बालक

                नींव सुदृढ़ होने पर ही

                सही बने मज़बूत इमारत ।।

Saturday, August 14, 2021

खेत-खलिहान

ग्रामीण अस्मिता के संवाहक 

सुख-समृद्धि के सोपान

भारत की आत्मा खेतों में

गाँव की इनसे पहचान

खाद्य उत्पादन के उत्प्रेरक

खेत, खलिहान और किसान ।

               सीधी, टेढ़ी-मेढ़ी आर

               खेतों के गले की हार

               कहीं हल तो कहीं ट्रैक्टर

               बीनें कहीं ख़र-पतवार

               रोपनी-कटनी दृश्य मनोरम    

               पकी फ़सल खलिहान गुलज़ार ।

सुबह-शाम खेत ही जीवन

खेत बिना जीवन वीरान

माथे पगड़ी और मुरैठा

हाथ में लाठी है पहचान

अर्थ-व्यवस्था की रीढ़ कृषक हैं

कर्म क्षेत्र खेत खलिहान ।

                खेतों से आती ख़ुशहाली

                कृषकों में ऊर्जा संचार

                हरे-भरे खेत लगे सुहावन    

                प्राकृतिक शोभा के भंडार

                असली भारत बसे गाँव में

                खेत खलिहान जीवन आधार ।

कृषि प्रधान देश भारत में

अर्थ व्यवस्था के आयाम

शस्य-श्यामला हरित-भरित

लोगों के बसते मन-प्राण

औद्योगीकरण के युग में

संरक्षित हों खेत खलिहान ।।

Monday, August 2, 2021

श्रम शक्ति

श्रम ही शक्ति, श्रम ही पूजा

इसका कोई विकल्प न दूज़ा

श्रम शक्ति दुनिया को प्यारी

कभी जाए न मेहनत ख़ाली

पत्थर काट बनती है राह

दशरथ माँझी बने सरताज ।

                    श्रम से ही सपने साकार

                    सफल जीवन का आधार

                    चींटी चलती कोशों दूर

                    आलस्य उसे नहीं मंजूर

                    श्रम शक्ति अनुपम, अनमोल

                    श्रम से बदले भाग्य योग ।

श्रम से कृषक उगाते अन्न

देश बने सक्षम-संपन्न

श्रम ही साधन, श्रम ही ध्येय

जीवन पथ का है पाथेय

श्रम से ज्ञान, श्रम से विज्ञान

श्रम से पूर्ण आस-अरमान ।

                    श्रम से जी चुराना पाप

                    बिना श्रम जीवन अभिशाप

                    श्रम से सुलझे बिगड़े काम

                    श्रम ही संज्ञा और सर्वनाम

                    वेद-पुराण का अंतर्निहित मंत्र

                    श्रम ही जीवन का मूलमंत्र ।।

Saturday, July 24, 2021

सादा जीवन है वरदान

दिखावा, आडंबर, अहंकार  

कृत्रिमता का कर परित्याग

सरलता, सादगी, सदव्यवहार

शांत अंत: करण, उच्च विचार

सहयोग, सम्मान, परोपकार

सफल जीवन के मूलाधार ।

गांधी, बुद्ध, और महावीर

मुंशी प्रेमचंद, संत कबीर

विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस

सादगी भरा समस्त जीवन

इच्छाओं का कर दमन-शमन

सादगी के प्रतीक कई संत ।

सादगी से चरित्र उज्ज्वल

रहन-सहन स्वच्छ निर्मल

अहिंसा, सत्कर्म, जनहित कार्य

सादा जीवन, सही विचार

अनंत इच्छा दुःख का कारण

साधारण बनना है असाधारण ।

त्याग, तपस्या अप्रतिम

भारतीय संस्कृति की है नींव

सादगी है सफलता का पर्याय

सहनशीलता, संयम है अनिवार्य

सादा जीवन सचमुच वरदान

सादगी में ही मानव कल्याण ।।

Saturday, July 10, 2021

गामक शीतल बसात

थाकल-हारल सदिखन मोन

शहरक जिनगी कान बिनु सोन

आपाधापी ओ भागमभाग

अपन गीत, अपन राग 

अपनापनक आस मतिभ्रम

दुःख मे दुर्लभ भेटब संग 

एकहि विकल्प एक गोट आस 

गामक बाट, गामक ठाठ

शहरक हवा सँ सरिपहुँ

नीक गाम-घरक बसात ।

                    शहरक जिनगी फ़्लैट मे सिमटल

                    दूरक पड़ोसी, यंत्रवत जिनगी

                    सभ किछु उपलब्ध मुदा

                    अपस्यात लोकसभ

                    चैन नहि जिनगी मे

                    आपकता अछि सिकुड़ल

                    गाम-घरक जिनगी थिक

                    प्रकृतिक सनेश-अथाह

                    शहरक जिनगी सँ सरिपहुँ

                    नीक गामक शीतल बसात ।

शहर जकाँ गाममे सेहो

ईर्ष्या-द्वेष, राग-विराग

प्रतिस्पर्धा, ओदौदक संग 

आडंबर, मिथ्या अलाप

इंसानियत जीवंत दृष्टिगत

सहयोग, त्याग, उपकार

दुःख मे मदतिक लेल अग्रसर

बीसरि पुरनका बात

शहरक दवाय सँ बेसी हितकर

गाम-घरक मलय बसात ।

                    ऊँच घर पक्का कंक्रिटक

                    चौरगर चमकैत बाट सपाट

                    राति जगमग दिन जकाँ

                    फ़्लाईओवरक सगरे जाल

                    गामक आनंद कतय शहर मे

                    प्रदूषण सँ वातावरण व्याप्त

                    देशक आत्मा बसल गाम मे

                    सर्वविदित अछि, सर्वज्ञात

                    शहरक जिनगी ज़ँ अछि उत्तम 

                    अति उत्तम गाम-घरक बसात ।।







Wednesday, June 30, 2021

गाँव की शीतल हवा


एकाक़ीपन का द्वंद्व

उद्वेलित अंतर्मन

थका-थका और व्यथित

अवसादित जनमन

आशा की एक किरण

एक ही विकल्प-आस

मनुज के हर मर्ज़ की

एक ही अचूक दवा

शहर की दवा से अच्छी

गाँव की शीतल हवा ।

            शहर की संस्कृति

            अपार्टमेंट में सिमटी

            दूर के पड़ोसी

            यंत्रवत ज़िन्दगी

            सबकुछ उपलब्ध यहाँ

            अपनत्व के सिवा

            अमृत-सरीखी है

            प्रकृति का अनुपम उपहार

            महौषधि है रामवाण

            गाँव की शीतल हवा ।

द्वेष भी, विद्वेष भी

आडंबर, आलाप भी

गाँव की ज़िन्दगी में

प्रतिस्पर्धा की आँच भी

इंसानियत जीवित फिर भी

सहयोग, सम्मान भी

कष्ट और विपत्ति में

न गिला, न शिकवा

शहर की दवा से अच्छी

गाँव की शीतल हवा ।

            गगनचुंबी अट्टालिकाएँ

            फ़्लाई ओवरों का जाल

            चमकीली सड़कें हैं

            हरित-भरित घिरे पार्क

            खेतों की हरियाली कहाँ

            विस्तृत अमराई नहीं

            गीत गातीं ललनाएँ

            दृष्टिगत जहाँ सदा

            शहर की दवा से अच्छी

            गाँव की शीतल हवा ।।