माघ शुक्ल पंचमी शुभ दिनबागेश्वरी की पूजा में लीनपुष्पित पल्लवित सुरभित बागढोल मजीरे पर गाते फागपीले सरसों-सा खिला बदनहर्षित आनंदित मानव मनईश्वर की अनुपम कृति बसंत।
Wednesday, July 15, 2020
ऋतुराज बसंत:जीवन-दर्शन
Sunday, July 12, 2020
गणेश महिमा
Friday, July 10, 2020
स्वर्णिम बचपन की स्मृति
सुंदरतम थे बचपन के दिन
न राग-द्वेष, न रंज-तंज
बाल-सखा संग दिनभर खेल
क्षण में लड़ाई, क्षण में मेल
बचपन का जीवन, सुरभित चंदन
मित्र-शत्रु सबका आलिंगन
निश्छल-निर्मल होता बचपन
सार्वभौम संदेश चिरंतन
बचपन में होती दिव्य दृष्टि
स्वर्णिम बचपन की मधुर स्मृति।
यादों के झरोखे बचपन के
मानस-पटल पर है जीवंत
न कोई चिंता, न बंधन
चटाई पर ही पठन-पाठन
स्याही-दावात, करची की कलम
गुरू की डाँट, कड़ा शासन
बस्ते का बोझ था न्यूनतम
जीवन-चर्या के नियत नियम
गुरू आदर और अनुशासन ही
सफल शिष्य का मानदण्ड।
ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती जाती है
चिंतित व्यथित होता तन-मन
बाल्यावस्था छोड़ के पीछे
मनुज पाता है यौवन
चपलता-चंचलता बचपन की
लोग जाते सबकुछ भूल
जीवन की जटिल समस्याओं में
सब हो जाते हैं मशगूल
बचपन का उत्सुक निर्मल मन
लील जाता है यौवन
सृष्टि का शाश्वत नियम है
लौटता नहीं खोया बचपन
स्मृतियाँ रह जाती शेष
बदली स्थिति, बदला परिवेश
झुक-झुक खोजें खोया बचपन
वृद्धजनों का चंचल मन
आदर-स्नेह देकर हरदम
बालपन को रखें जीवंत
स्वर्णिम बचपन की स्मृति को
वृद्धजनों में खोजें हम।।
Wednesday, July 8, 2020
अब मत आना लहर सुनामी
तुमने लाखों घर को लीले,
लोगों के संसाधन छीने।
कहीं छोड़ दी घर वीराना,
सुबक रहा बच्चा अनजाना।
लाशों के अंबार लगाकर,
बड़ी तबाही तुमने आनी,
अब मत आना लहर सुनामी।।
नाम सुनामी, काम बेमानी,
तुमने की सारी मनमानी।
बड़ी त्रासदी तुमने लाई,
हठी कुलक्षणी सुरसा माई।
कितनी भूख लगी थी तुमको,
हाहाकारी निर्दयी अभिमानी,
अब मत आना लहर सुनामी।।
मानवता से हार गई तुम
चोरी-छिपके भाग गई तुम।
मानवता से मत टकराना,
मात अंत में तुझे है खाना,
लोगी तुम कितनी कुर्बानी।
अब मत आना लहर सुनामी।।
बुलबुल, तितली, हुदहुद, निसर्ग
फानी, निलोफर या अम्फान
सब पर लगे हुए हैं पहरे
दूर रखना है घातक लहरें
मानवता ने है प्रण ठानी
सजग-सतर्क हैं सुधि-विज्ञानी
अब मत आना लहर सुनामी ।।
Monday, July 6, 2020
तनाव-प्रबंधन
जीवन की गुणवत्ता, गरिमा में,
परिलक्षित हो जब परिवर्त्तन
संतुलन का अभाव जीवन में
चिंतित, विचलित हो मानव-मन
बदला-बदला-सा हो जीवन
एकाकीपन का अहर्निश भान
अव्यवस्थित-अनियमित दिनचर्या
तनावग्रस्तता की पहचान।
अपेक्षा-वास्तविकता में अंतर
प्रियजन वियोग, जीविका ह्रास
सामाजिक अपमान, स्वास्थ्य हानि
निर्णय क्षमता में असामान्य
उचित-अनुचित का नहीं ज्ञान
छिन जाए जीवन की मुस्कान
उपचार-उपाय संबल-सार्थक
तनाव प्रबंध है आवश्यक।
परिवारिक सामाजिक स्थिति
आर्थिक परिदृश्य हो प्रतिकूल
स्वास्थ्यजनित गंभीर समस्या
चिंतित, उद्वेलित मन बिल्कुल
आंतरिक वातावरण, प्रदूषण भी
तनाव-वृद्धि में है उत्प्रेरक
तनावग्रस्तता की स्थिति में
जन-जीवन पर निश्चित संकट।
केन्द्रीय तंत्रिका-तंत्र निर्बल
श्वसन समस्या, हृदय-रोग
त्वचा रोग, मानसिक संताप
जीवन लगता है अभिशाप
झल्लाहट, शंका, स्वर कठोर
जीवन का यह कठिनतम दौर
तिल-तिल कर जलता मानव-मन
स्नेही-स्वजन दें अपनापन।
समय प्रबंधन, सार्थक सोच
हितभुक्, मितभुक्, ऋतभुक् भोग
पर्याप्त निद्रा, शारीरिक कार्य
योग-प्राणायाम अति अनिवार्य
प्रियजन वार्ता और आराम
व्यर्थ बातों का नहीं संज्ञान
अध्यात्म शरण, पालें कुछ शौक
संतुलित जीवन रहें निरोग।
सुख-दुख रहता है आजीवन
कर्म करें, न फल चिंतन
सुख है रंग-विरंगी तितली
पीछा करने पर उड़ जाती
स्वतः बैठती आ कंधे पर
काली घटा में जैसे बिजली
चिंतामुक्त कर्म ही जीवन
तनाव-प्रबंधन का दर्पण-दर्शन।।
Friday, July 3, 2020
अतुलित अनुपम है उद्यान

Tuesday, June 30, 2020
सुपौल परिचय

बिहार राज्य की हृदय स्थली
कंचन हिमजल से सिंचित
भारत-नेपाल की सीमा पर
सुंदर दरवाजा सुपौल है स्थित
उत्तर में नेपाल अवस्थित
दक्षिण में मधेपुरा-सहरसा
अररिया जिला है पूरब में
पश्चिम में मधुबनी बसा।
भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से
चतुर्थ कल्प होलोसीन में निर्माण
मुंगेर-भागलपुर में पूर्व में शामिल
सुपौल है बिहार की शान
सभ्यता संस्कृति,रहन-सहन
भाषा-बोली संग परिधान
राजनीतिक चेतना,संघर्ष भावना
गागर में सागर का भान।
आम,बरगद,पीपल,नीम
कटहल,महुआ और पलाश
गेंदा,गुलाब,बेली,सूर्यमुखी
प्राकृतिक सौंदर्य में लाये निखार
कहीं-कहीं विद्यमान है अब भी
साल-शीशम,ताड़-खजूर
नीलगाय के भी दर्शन होते
कौआ,गौरैया,हंस,गरूड़।
तिलयुगा,धेमुरा और कोसी
आच्छादित है क्षेत्र सुपौल
धान,मूँग,मक्के की खेती
जूट की खेती भी करते लोग
पशुपालन,मछली पालन संग
मखाना उत्पादन भी संभाव्य
शस्य-श्यामला भूमि जिले की
छह ऋतुओं की है श्रृंगार।
हरदी की वनदुर्गा,गढ़ लोरिक
परसरमा की गोसाईं कुटी
राजेश्वरी की माँग भगवती
कर्णपुर की कृष्णाष्टमी
गनपतगंज का विष्णुधाम
कपिलेश्वर-तिलहेश्वर हैं प्रसिद्ध
वाजितपुर ऐतिहासिक स्थल
पुरातत्त्वविदों की पड़ी दृष्टि।
त्रिवेणीगंज का सिख गुरूद्वारा
गिरिजाघर भी नामचीन
भूतही दरगाह में पूर्ण मनौती
लोगों की लगती है भीड़
कर्णदेव से जुड़ा हुआ है
कर्णपुर प्राचीन ग्राम
नमक आंदोलन का विगूल फूंक
लाल बाबाजी बने महान।
सांस्कृतिक विविधता,अनेकता में एकता
स्वतंत्रता-संग्राम में सपूतों की वीरता
गाँधी-विनोवा का जिला ने किया सम्मान
राजेन्द्र बाबू भी आए करने
पूर्वी बाँध का निर्माण
लोग-बाग शांत हैं,साक्षी है अंशुमान
सांप्रदायिक सौहाद्र का
स्थापित है कीत्तिमान।
साहित्य सृजन की सिद्धभूमि
कवि-मनीषी हुए अनेक
मुख्यरूप से मैथिलीभाषी
नहीं किसी से राग-द्वेष
परंपराएँ,अद्वितीय,अनुपम
मूज,मेखला और मड़वा
मधुश्रावणी में नव-विवाहिता
करती हैं विषहरी की पूजा।
कोशी की कल-कल धारा में,
कोयल की कूक और भौंरे के गूंजन में
मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारा में
हम सबके अरमान प्रबल
प्रगति-पथ पर सतत् अग्रसर
खुशहाली,शांति चहुँओर
जन-मानस की यही कामना
सुख-समृद्धिमय रहे सुपौल।




