Wednesday, July 15, 2020

ऋतुराज बसंत:जीवन-दर्शन


प्रकृति का पुलकित अंग-अंग 
कण-कण में उल्लास-उमंग
भौंरे का मधुमय स्वर गुंजन
पंचम सुर में कोयल गायन
पृथ्वी परिपूरित पीत बसन
वैविध्य और विस्तार संग
"ऋतुनां कुसुमाकर" है बसंत।

माघ शुक्ल पंचमी शुभ दिन 
बागेश्वरी की पूजा में लीन 
पुष्पित पल्लवित सुरभित बाग 
ढोल मजीरे पर गाते फाग 
पीले सरसों-सा खिला बदन
हर्षित आनंदित मानव मन
ईश्वर की अनुपम कृति बसंत।

ईश्वर की सृष्टि जीवन का राग
ऋतु मात्र नहीं,है मनोभाव
मंगल प्रतीक स्वर्णिम प्रभात 
विरह मिलन का संधि काल 
आलोकित करता  दिग् दिगंत 
देशभक्त वीर जवानों का 
बसंती चोला है बसंत।

सूखी नदियां कटते जंगल 
पक्षी के उजड़ते आश्रय स्थल 
मानव लिप्सा का है प्रतिफल 
पर्यावरण संरक्षण ही विकल्प
जल-जंगल रक्षा का संकल्प 
पृथ्वी रक्षा अपनी रक्षा 
ऋतु बसंत की शाश्र्वत शिक्षा।

कोयल-सी कुक भौंरे-सा गान
अधर पर फूलों-सी मुस्कान 
व्यवहार कुशल हो जन मानस 
हरित-भरित हो वन-उपवन 
प्रकृति संरक्षण का मूल मंत्र
जल हरियाली से ही जीवन 
ऋतु बसंत का जीवन दर्शन।।

Sunday, July 12, 2020

गणेश महिमा



शुभ गुण कानन देव गजानन
शिव-पार्वती पुत्र गणेश 
सिंह,मयूर और मूषक वाहन 
सिद्ध विनायक हरे क्लेश 
पाश,अंकुश,वरमुद्रा धारण
लंबोदर गणपति गणेश।

चतुर्बाहु सिर चंदन धारण
मोदक है उत्तम प्रिय भोजन 
चंद्रदेव ने किया उपहास 
तुरत दिया उनको अभिशाप 
शीघ्र प्रसन्न होते भगवान 
चंद्र देव को दिया वरदान।

चौठचंद्र का करते दर्शन 
श्रद्धा पूर्वक करते वंदन
विघ्नहर्त्ता की कृपा अनंत
धन धान्य समृद्धि संपन्न 
बुद्धि-विवेक में अतुल्य अनन्य
भालचंद्र गणेश गजकर्ण।

प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री 
ऋद्धि-सिद्धि के पति गणेश 
लाभ-क्षेम शुभ मंगलकारी 
रक्त वर्ण पितांबर धारी
विद्यारंभ या अन्य शुभ काम 
शुभ लाभ स्वस्तिक निर्माण।

पुराणों में विरुदावली वर्णन
गणेश लीला का महिमामंडन 
माता-पिता को मान त्रिलोक 
प्रथम पूज्य पूजै तिहूॅ ‌लोक
एकदंत बिना कोई न दूजा 
मंगल मूर्ति की करें सब पूजा।।

Friday, July 10, 2020

स्वर्णिम बचपन की स्मृति


सुंदरतम थे बचपन के दिन

न राग-द्वेष, न रंज-तंज

बाल-सखा संग दिनभर खेल

क्षण में लड़ाई, क्षण में मेल

बचपन का जीवन, सुरभित चंदन

मित्र-शत्रु सबका आलिंगन

निश्छल-निर्मल होता बचपन

सार्वभौम संदेश चिरंतन

बचपन में होती दिव्य दृष्टि

स्वर्णिम बचपन की मधुर स्मृति।


यादों के झरोखे बचपन के

मानस-पटल पर है जीवंत

न कोई चिंता, न बंधन

चटाई पर ही पठन-पाठन

स्याही-दावात, करची की कलम

गुरू की डाँट, कड़ा शासन

बस्ते का बोझ था न्यूनतम

जीवन-चर्या के नियत नियम

गुरू आदर और अनुशासन ही

सफल शिष्य का मानदण्ड।


ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती जाती है

चिंतित व्यथित होता तन-मन

बाल्यावस्था छोड़ के पीछे

मनुज पाता है यौवन

चपलता-चंचलता बचपन की

लोग जाते सबकुछ भूल

जीवन की जटिल समस्याओं में

सब हो जाते हैं मशगूल

बचपन का उत्सुक निर्मल मन

लील जाता है यौवन


सृष्टि का शाश्वत नियम है

लौटता नहीं खोया बचपन

स्मृतियाँ रह जाती शेष

बदली स्थिति, बदला परिवेश

झुक-झुक खोजें खोया बचपन

वृद्धजनों का चंचल मन

आदर-स्नेह देकर हरदम

बालपन को रखें जीवंत

स्वर्णिम बचपन की स्मृति को

वृद्धजनों में खोजें हम।।


Wednesday, July 8, 2020

अब मत आना लहर सुनामी


तुमने लाखों घर को लीले,

लोगों के संसाधन छीने।

कहीं छोड़ दी घर वीराना,

सुबक रहा बच्चा अनजाना।

लाशों के अंबार लगाकर,

बड़ी तबाही तुमने आनी,

अब मत आना लहर सुनामी।।


नाम सुनामी, काम बेमानी,

तुमने की सारी मनमानी।

बड़ी त्रासदी तुमने लाई,

हठी कुलक्षणी सुरसा माई।

कितनी भूख लगी थी तुमको,

हाहाकारी निर्दयी अभिमानी,

अब मत आना लहर सुनामी।।


मानवता से हार गई तुम

चोरी-छिपके भाग गई तुम।

मानवता से मत टकराना,

मात अंत में तुझे है खाना,

लोगी तुम कितनी कुर्बानी।

अब मत आना लहर सुनामी।।


बुलबुल, तितली, हुदहुद, निसर्ग 

फानी, निलोफर या अम्‍फान

सब पर लगे हुए हैं पहरे 

दूर रखना है घातक लहरें

मानवता ने है प्रण ठानी 

सजग-सतर्क हैं सुधि-विज्ञानी 

अब मत आना लहर सुनामी ।।


Monday, July 6, 2020

तनाव-प्रबंधन


जीवन की गुणवत्ता, गरिमा में,

परिलक्षित हो जब परिवर्त्तन

संतुलन का अभाव जीवन में

चिंतित, विचलित हो मानव-मन

बदला-बदला-सा हो जीवन

एकाकीपन का अहर्निश भान

अव्यवस्थित-अनियमित दिनचर्या

तनावग्रस्तता की पहचान।

अपेक्षा-वास्तविकता में अंतर

प्रियजन वियोग, जीविका ह्रास

सामाजिक अपमान, स्वास्थ्य हानि

निर्णय क्षमता में असामान्य

उचित-अनुचित का नहीं ज्ञान

छिन जाए जीवन की मुस्कान

उपचार-उपाय संबल-सार्थक

तनाव प्रबंध है आवश्यक।

परिवारिक सामाजिक स्थिति

आर्थिक परिदृश्य हो प्रतिकूल

स्वास्थ्यजनित गंभीर समस्या

चिंतित, उद्वेलित मन बिल्कुल

आंतरिक वातावरण, प्रदूषण भी

तनाव-वृद्धि में है उत्प्रेरक

तनावग्रस्तता की स्थिति में

जन-जीवन पर निश्चित संकट।

केन्द्रीय तंत्रिका-तंत्र निर्बल

श्वसन समस्या, हृदय-रोग

त्वचा रोग, मानसिक संताप

जीवन लगता है अभिशाप

झल्लाहट, शंका, स्वर कठोर

जीवन का यह कठिनतम दौर

तिल-तिल कर जलता मानव-मन

स्नेही-स्वजन दें अपनापन।

समय प्रबंधन, सार्थक सोच

हितभुक्, मितभुक्, ऋतभुक् भोग

पर्याप्त निद्रा, शारीरिक कार्य

योग-प्राणायाम अति अनिवार्य

प्रियजन वार्ता और आराम

व्यर्थ बातों का नहीं संज्ञान

अध्यात्म शरण, पालें कुछ शौक

संतुलित जीवन रहें निरोग।

सुख-दुख रहता है आजीवन

कर्म करें, न फल चिंतन

सुख है रंग-विरंगी तितली

पीछा करने पर उड़ जाती

स्वतः बैठती आ कंधे पर

काली घटा में जैसे बिजली

चिंतामुक्त कर्म ही जीवन

तनाव-प्रबंधन का दर्पण-दर्शन।।


Friday, July 3, 2020

अतुलित अनुपम है उद्यान


ग्लोबल वार्मिंग
वायु प्रदूषण
ध्वनि प्रदूषण
त्रस्त जनजीवन
स्पर्धा औ आपाधापी
एकाकीपन का भान
ऐसे में आश्रयदाता
जयप्रकाश उद्यान
अतुलित अनुपम है उद्यान।

मनभावन वयार
शांति की फुहार
आशा का संचार
बच्चे-बूढ़े और जवान
एकत्र होते सुबह-शाम
सभा-सम्मेलन का स्थान
सामाजिक समरसता का पैगाम
अंग-प्रदेश की पहचान
अतुलित अनुपम है उद्यान।

कहीं योगगुरू का ध्यान
कहीं सास-बहु की दास्तान
राजनीति की चर्चा सरेआम
अध्ययन, खेलकूद, व्यायाम
भागलपुर का हृदय स्थान
रोगी का है रामवाण
जन-जन के जिसमें बसे प्राण
माटी है चंदन समान
अतुलित अनुपम है उद्यान।           

भागलपुर के कर्णधार
सुन लें अब इसकी पुकार
कलरव करते पक्षी हरपल
विचरण करती हो नीलगाय
झरझर झरने बहते अविरल
जल हंसों की हो मनुहार
सब मिलकर कायाकल्प करें
वापस हो इसकी आन-वान
अतुलित अनुपम है उद्यान। 

Tuesday, June 30, 2020

सुपौल परिचय



बिहार राज्य की हृदय स्थली

कंचन हिमजल से सिंचित

भारत-नेपाल की सीमा पर

सुंदर दरवाजा सुपौल है स्थित

उत्तर में नेपाल अवस्थित

दक्षिण में मधेपुरा-सहरसा

अररिया जिला है पूरब में

पश्चिम में मधुबनी बसा।

भू-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से 

चतुर्थ कल्प होलोसीन में निर्माण

मुंगेर-भागलपुर में पूर्व में शामिल

सुपौल है बिहार की शान

सभ्यता संस्कृति,रहन-सहन

भाषा-बोली संग परिधान

राजनीतिक चेतना,संघर्ष भावना

गागर में सागर का भान।

आम,बरगद,पीपल,नीम

कटहल,महुआ और पलाश

गेंदा,गुलाब,बेली,सूर्यमुखी

प्राकृतिक सौंदर्य में लाये निखार

कहीं-कहीं विद्यमान है अब भी

साल-शीशम,ताड़-खजूर

नीलगाय के भी दर्शन होते

कौआ,गौरैया,हंस,गरूड़।

तिलयुगा,धेमुरा और कोसी

आच्छादित है क्षेत्र सुपौल

धान,मूँग,मक्के की खेती

जूट की खेती भी करते लोग

पशुपालन,मछली पालन संग

मखाना उत्पादन भी संभाव्य

शस्य-श्यामला भूमि जिले की

छह ऋतुओं की है श्रृंगार।

हरदी की वनदुर्गा,गढ़ लोरिक

परसरमा की गोसाईं कुटी

राजेश्वरी की माँग भगवती

कर्णपुर की कृष्णाष्टमी

गनपतगंज का विष्णुधाम

कपिलेश्वर-तिलहेश्वर हैं प्रसिद्ध

वाजितपुर ऐतिहासिक स्थल

पुरातत्त्वविदों की पड़ी दृष्टि।

त्रिवेणीगंज का सिख गुरूद्वारा

गिरिजाघर भी नामचीन

भूतही दरगाह में पूर्ण मनौती

लोगों की लगती है भीड़

कर्णदेव से जुड़ा हुआ है

कर्णपुर प्राचीन ग्राम

नमक आंदोलन का विगूल फूंक

लाल बाबाजी बने महान।


सांस्कृतिक विविधता,अनेकता में एकता

स्वतंत्रता-संग्राम में सपूतों की वीरता

गाँधी-विनोवा का जिला ने किया सम्मान

राजेन्द्र बाबू भी आए करने

पूर्वी बाँध का निर्माण

लोग-बाग शांत हैं,साक्षी है अंशुमान

सांप्रदायिक सौहाद्र का

स्थापित है कीत्तिमान।

साहित्य सृजन की सिद्धभूमि

कवि-मनीषी हुए अनेक

मुख्यरूप से मैथिलीभाषी

नहीं किसी से राग-द्वेष

परंपराएँ,अद्वितीय,अनुपम

मूज,मेखला और मड़वा

मधुश्रावणी में नव-विवाहिता

करती हैं विषहरी की पूजा।


कोशी की कल-कल धारा में,

कोयल की कूक और भौंरे के गूंजन में

मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारा में

हम सबके अरमान प्रबल

प्रगति-पथ पर सतत् अग्रसर

खुशहाली,शांति चहुँओर

जन-मानस की यही कामना

सुख-समृद्धिमय रहे सुपौल।