पर्दे की आड़
कृत्रिम बयार
अहं का टकराव
बढ़ता दुराव
एकाकीपन का भान
अभिजनवर्ग की पहचान
रेलवे का वातानुकूलित यान।
पूँजीवाद की शान
सुविधा-सम्पन्नों का सम्मान
अहर्निश उपलब्ध होते हैं
आवश्यकता के साजो-सामान
आम यात्री का वर्जित स्थान
बड़े लोगों की है आन-बान
रेलवे का वातानुकूलित यान।
इंजन है एक
यात्री अनेक
निर्धन-धनी का भेद
चुनिंदा लोगों का प्रवेश
जन पर अभिजन का वेटेज
रेलवे का वातानुकूलित यान।
यही देता है पैगाम
मिटाता धनी-निर्धन का भेद
बिना देखे सामाजिक परिवेश
अनेकता में एकता का भान
सामाजिक समरसत्ता का मान
भारतीय संस्कृति की पहचान
लोकतंत्र का समुचित सम्मान
समाजवादी है साधारण यान।।
समाजिक समरस्ता को दर्शाती है एवं प्रेरणा दायक कविता।
ReplyDeleteसाधारण यान और वातानुकूलित यान के भेदों का सचित्र विवरण। साधारण यान में भी आरक्षित सीट और अन्य सुविधाओं को बढ़ाना चाहिए सर
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteजिन्दगी के एक हिस्से के ज्ञान को कविता में आपने लिख दिया सर ।। प्रेरणादायक 🙏
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