Saturday, July 18, 2020

अनुशासन-संकल्प


स्व-अनुशासन आत्म-नियंत्रण

नियमित चर्या, समय पर काम

अनुशासन बिन निष्क्रिय जीवन

बिनु पतवार नौका समान

सुख-शांति वैभवमय जीवन 

अनुशासन से मान-सम्मान

अनुशासित आचरण ही है

सफल जीवन का प्रथम सोपान।

प्रकृति नहीं करती उल्लंघन

अनुशासन की लक्ष्मण-रेखा

समय पर होता ऋतु-परिवर्तन

समय पर होती गर्मी-वर्षा

समयबद्ध सबकी दिनचर्या

सूर्य,चन्द्रमा या नक्षत्र

अनुशासन पर ही आधारित

पृथ्वी-नभ का जीवन-चक्र।

अनुशासन सफलता की कुंजी                            

छात्र-जीवन का मुख्य आधार

अनुशासन ही पुरोवाक् है

अध्यवसाय,कृषि,व्यापार 

सेना में सर्वोपरि अनुशासन

अनुशासनहीनता है अभिशाप 

अनुपम जीवन-दर्शन है यह 

सफलता के खोले दस द्वार।

अनुशासन नियम-संयम है

नहीं यह बंधनों का अभाव

सामाजिक बंधन अंतर्गत

व्यवहार उचित, विवेक-विचार

स्वतः स्फूर्त है अनुशासन

इसका कोई नहीं विकल्प 

महापर्व यह जीवन-भर का

अनुशासन का लें संकल्प।।


1 comment:

  1. अनुशासित जीवनचर्या प्रकृति का अनुपम उपहार है। व्यक्तिविशेष पर निर्भर करता है कि वह प्रकृति प्रदत्त जीवनचर्या को अपने व्यक्तिगत जीवनशैली में कैसे आबद्ध करता है । कहीं न कहीं प्रकृति प्रदत्त अनुशासन को मनोभाव से नहीं स्वीकारने के कारण ही हमारी प्राकृतिक व्यवस्था अकारण प्राकृतिक आपदा का स्वरूप ग्रहण कर लेती है,और हम प्रकृति को दोषी ठहराने की कोशिश में लगे जाते हैं । जबकि विश्लेषण मात्र से स्पष्ट है कि मानव ही कुकृत्यों के कारण इसके लिए दोषी है ।
    आपकी रचना सारगर्भित है,जो अनुशासनिक प्रवृत्तियों का जयघोष के प्रति इशारा कर रही है । अनुशासन चाहे प्रकृति प्रदत्त हो,या सामाजिक अथवा पारिवारिक पृष्ठभूमि से हो, उसे आलिंगन कर ही हम स्वयं, परिवार, समाज, देश और प्रकृति को अनुशासित रखने में कामयाब हो पाएंगे।

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